देहरादून- प्रदेश में नगर निकाय चुनाव नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब भाजपा व कांग्रेस का फोकस अपनी पार्टी से बागी हुए नेताओ को मनाने की ओर हो चला है।क्योंकि देहरादून सहित पूरे प्रदेश के नगर निगम,नगर पालिका व नगर पंचायतों में टिकट ना मिलने से नाराज भाजपा व कांग्रेस के नेता पार्टी से बागी रुख अख्तियार कर निर्दलीय के तौर पर अपना नामांकन करा चुके है। इसलिए 27 अक्टूबर नाम वापसी तक भाजपा व कांग्रेस बागी हो चुके अपने कार्यकर्ताओं को मनाने के मिशन पर जुट चुकी है।भारतीय जनता पार्टी ने तो प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के निर्देश पर चुनाव संचालन समिति का भी गठन कर लिया है। साथ ही अपने मंत्रियों को पूरे प्रदेश में बागी हो चुके कार्यकर्ताओ को मनाने की जिम्मेदारी दी गई है। नगर निकाय चुनाव में भाजपा के अधिकृत प्रत्यासियो के खिलाफ ताल ठोकने वाले बागियों को किसी भी सूरत पर मनाने के मिशन पर भाजपा संगठन जुट चुका है। क्योंकि नगर निगम,नगर पालिका व नगर पंचायत अध्यक्ष पदों पर पूरे प्रदेश में भाजपा के लगभग 38 बागी प्रत्यासी मैदान में उतर ताल ठोक रहे है। जिन्हें मंत्रियों के जरिये मनाने को भाजपा संगठन काम कर रहा है। क्योंकि कई सीटों पर भाजपा के बागी भाजपा के अधिकृत प्रत्यासी को नुकसान पहुँचाने का मादा भी रखते है। इसलिए भाजपा किसी भी सूरत पर अपने निकाय चुनाव के पिछले बेहतरीन प्रदर्शन को जारी रखना चाहती है। जिससे आने वाले लोकसभा चुनाव के मिशन में भाजपा कार्यकर्ताओ के उत्साह में कतई भी कमी ना आ पाए। खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून मेयर चुनाव में डेमेज कंट्रोल की कमान सँभाल ली है। ताकि राजधानी में मेयर पद पर भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को विजय हासिल करने में अपने बाधा ना बन पाए।
वही नगर निकाय चुनाव में प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को भी कई सीटों अपने बागियों की बगावत को झेलना पड़ रहा है।जिसके लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों,विधायकों, वरिष्ठ नेताओं व पदाधिकारियों को बागियों को हर हाल में मनाकर पार्टी के अधिकृत प्रत्यासी के पक्ष में लाने का जिम्मा दे दिया है। कांग्रेस खुद देहरादून की मेयर सीट पर पशोपेश की स्थिति पर है। क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के छोटे भाई ने सचिन उपाध्याय ने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्यासी दिनेश अग्रवाल के खिलाफ मेयर पद पर अपना नामांकन करा दिया है। जिससे कांग्रेस को किरकिरी से जूझना पड़ रहा है। इसलिए प्रीतम सिंह स्वंयम इस सीट पर किशोर उपाध्याय के माध्यम से उनके भाई को कांग्रेस के समर्थन में बैठाने का प्रयास कर रहे है। वही नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस हर हाल में बेहतरीन प्रदर्शन करना चाहती है। जिससे आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस के कार्यकर्ता बड़ी ऊर्जा के साथ जुट सके। इसलिए कांग्रेस संगठन पूरे प्रदेश में निकाय चुनाव में बागी हुए अपने कार्यकर्ताओं को मनाने में जुट चुका है।
बहरहाल दोनों राष्ट्रीय दल भाजपा व कांग्रेस नगर निकाय चुनाव में डेमेज कंट्रोल को रोकने की कवायत में जुट चुके है। क्योंकि बागियों की तेवर उनके चुनावी मैदान में रहने से भाजपा व कांग्रेस को कई सीटो पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए दोनों दल बिलकुल भी नही चाह रहे है अपने के ही चलते निकाय चुनाव के परिणाम में पार्टी के पक्ष में आने वाले चुनावी परिणाम किसी भी सूरत में प्रभावित हो सके।हालांकि नगर निकाय चुनाव नाम वापसी तक बागियों को साधने के मिशन पर कांग्रेस व भाजपा निकल चुकी हो लेकिन ये अब देखना होगा कि भाजपा व कांग्रेस के रणनीतिकार समय रहते कितना बागियों को अपने पक्ष में ला पाते है। साथ ही निकाय चुनाव में डेमेज कंट्रोल की कवायत आखिर नाम वापसी तक कितना रंग दिखा पाती है।
