शहादत के एक साल बाद आज भी सरकार नहीं है अपने किए वायदों पर संजीदा,
दी टॉप टेन न्यूज(खटीमा)- आज से ठीक एक साल पहले कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देश के 40 वीर सीआरपीएफ जवानों ने देश रक्षा में अपनी शहादत दी थी। देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों में उत्तराखण्ड के खटीमा का लाल वीर शहीद वीरेंद्र सिंह राणा भी थे। 14 फरवरी 2019 को कश्मीर के पुलवामा में हुए इस आतंकी हमले को आज भी देश भूल नही पाया है। इस आतंकी हमले में शहीद वीरेंद्र के परिवार से बहुत कुछ एक झटके में छीन लिया था। जंहा वीरेंद्र की शहादत से परिवार का जवान बेटा उनसे छीन गया। वही शहीद के पांच साल की बेटी रूही व ढाई साल के बेटे बयान के सिर से पिता का साया उठ गया था। इन एक सालों ने वीरेंद्र की शहादत के बाद परिवार ने खुद को संभालने की कोशिश जरूर की है।लेकिन आज भी अपने पिता की शहादत से शहीद वीरेंद्र के मासूम बच्चे अपने पिता के आने की राह देख रहे है।

वीरेंद्र की पत्नी रेनू राणा को उत्तराखण्ड सरकार की तरफ से तहसील खटीमा में सरकारी नौकरी व आर्थिक सहायता जरूर मिल गई।लेकिन आज भी सरकार के कई इसे वायदे है जिन्हे सरकार पूरा नहीं कर पाई है।शहीद वीरेंद्र की शहादत पर जंहा शहीद की पत्नी रेनू को गर्व है लेकिन अपने पति की कमी को आज भी वह मह्सुश कर अपने आशुओँ को नही रोक पाती।लेकिन इस सबके बावजूद इस वीर वीरांगना का दिल तब छलनी हो जाता है जब उसके मासूम बच्चे अपने पिता के घर कब आने का सवाल पूछते है।

वीरेंद्र की शहादत के समय सरकार के कई वायदों को आज भी अधूरा पा शहीद की पत्नी दुखी है। सरकार ने शहीद की पत्नी को आर्थिक सहायता व नोकरी देने का वायदा तो पूरा कर दिया। लेकिन शहीद की पत्नी के अनुसार देश के लिए महान शहादत देने के बावजूद भी वीरेंद्र के सम्मान में सरकार कुछ नही कर पाई। गांव के स्कूल का नाम जरूर शहीद के नाम पर रख दिया गया हो लेकिन गांव की सड़क,शहीद द्वार व वीरेंद्र की मूर्ति बनाने के सब वादे अधूरे ही रह गए।
वही अपने जवान बेटे की शहादत के बाद अपनी अंतिम अवस्था मे जी रहे शहीद वीरेंद्र के पिता दीवान सिंह अपनी बहू की नॉकरी के बाद अपने बड़े बेटे के साथ गांव में ही रह रहे है। वही शहीद के पिता नानक सागर से शहीद के गांव तक सड़क के एक साल बाद भी जर्जर होने से दुखी है। उनके अनुसार सरकार ने ना तो शहीद के नाम पर गांव की सड़क का निर्माण कराया ओर ना ही गांव में शहीद द्वारा या शहीद की आज तक कोई मूर्ति लग पाई। शहीद के पिता उत्तराखण्ड सरकार से अपने शहीद बेटे के सम्मान में अपने वादों को पूरा करने की आज भी उम्मीद लगाए हुए है।ताकि उनके बेटे की शहादत को सच्चा सम्मान मिल सके।

जबकि शहीद वीरेंद्र की शहादत के बाद शहीद के गांव मोहम्मदपुर भुडिया के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नाम सरकार ने शहीद वीरेंद्र के नाम पर जरूर कर दिया था। वही इस स्कूल में पड़ने वाले बच्चे अपने गांव के वीर शहीद वीरेंद्र की शहादत पर गर्व की अनुभूति करते है। वही बड़े होकर वो भी फ़ौज में जा आतंकी के सर्वनाश का मंसूबा अपने भीतर पाले हुए है।
पुलवामा हमले की पहली वर्षी पर उत्तराखण्ड के लाल वीर शहीद वीरेंद्र सिंह राणा के गांव को जाने वाली जर्जर सड़क आज भी अपने बनने का इंतजार कर रही है। सरकार जंहा एक साल बाद भी शहीद वीरेंद्र के परिवार से किये वायदों को अमलीजामा नही पहना पाई हो ।वही शहीद का परिवार जरूर ये सवाल पूछता है कि आखिर क्यों उनके शहीद बेटे के सम्मान में सरकार द्वारा किये गए वायदे आज तक पूरे नही हो पाए।
