बड़ा सवाल क्या धरातल पर सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त उत्तराखण्ड कर पायेगी सरकार?

दी टॉप टेन न्यूज़ ब्यूरो (देहरादून)- आज देहरादून में सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त अभियान के तहत 50 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला में एक लाख से अधिक सरकारी गैर सरकारी संस्थानों के कर्मचारी स्वयंसेवी संगठनों के लोग स्कूली बच्चों सहित शिक्षकों ने व स्वयं पुलिस विभाग के आला अफसरों ने भाग लेकर लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त ग्रीन दून अभियान के तहत जागरूक किया ।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री ने मियांवाला देहरादून मार्ग पर 9:30 बजे हरी झंडी दिखाकर की वह दून के मेयर सुनील उनियाल गामा के साथ इस अभियान की अगुवाई कर रहे थे
हालांकि इस अभियान के तहत रूट डायवर्ट होने के कारण दून वासियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा कहीं एंबुलेंस को जाम में फंसना पड़ा तो कहीं-कहीं पर रूट डाइवर्ट का पालन नहीं किया गया और लोग सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाते दिखे।
इस तरह के अभियान को चलाने से पूर्व नगर निगम से लेकर सरकारी तंत्र को यह समझना जरूरी होगा कि जब तक सिंगल यूज़ प्लास्टिक का विकल्प नहीं ढूंढ लिया जाता है तब तक इस तरह के अभियानों को हम अमली जामा नहीं पहना सकते है।
अकेले देहरादून शहर में ही रोज सुबह सुबह बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दूध दही के कई लाख पैकेट पहुंचते हैं इसके साथ आज हम किसी भी छोटे स्टोर से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल में ग्रॉसरी सामान लेते हैं तो वह सब प्लास्टिक की पैकेजिंग में ही मिलता है यह सब सामान दालों से लेकर तेल मसाले चाय की पत्ती चीनी बिस्किट नमकीन इत्यादि होते हैं। इन सब के खिलाफ अभियान कौन चलाएगा और कब चलाएगा, इन सबसे ज्यादा खतरनाक छोटे पाउचों में आने वाले शैंपू, तेल गुटखा,तंबाकू आदिअन्य उत्पाद है। अगर इन सब पर प्रतिबंध लगता है तो यह उद्योग करोड़ों अरबो की चपेट में आ जाएंगे क्योंकि समाज में इन छोटे उत्पादों की पैकेजिंग के उपभोक्ता बहुत अधिक है।
जब किसी भी शहर के नगर निगम निकायों द्वारा प्लास्टिक के विरोध अभियान चलाया जाता है तो छापेमारी छोटे व्यापारी रेडी ठेले वालों परकर हजारों रुपए का चालान काट दिया जाता है,कभी भी किसी डिपार्टमेंटल स्टोर या शॉपिंग मॉल मैं चालान नहीं किया जाता है ।
इस तरह के प्लास्टिक मुक्त अभियान वास्तव में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक छोटी सी पहल तो हो सकती है पर संपूर्ण रूप से प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड या प्लास्टिक मुक्त देश अभी दूर की कौड़ी है।इस तरह के अभियानों को कर शासन प्रशासन के मात्र औपचारिकता निभाने वाले कार्यक्रमो कह सकते है। क्योंकि इन अभियानों का उद्देश्य तो बड़ा होता है लेकिन उसको पूर्ण रूप से धरातल पर उतारने की मंशा शासन या प्रशासन में ईमानदार रूप से नही होती है। इसलिए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री का सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान को अभी हम दूर की कौड़ी ही कहेंगे।
