डेंगू पर कैसी होगी रोकथाम,कितने डेंगू रोगी स्वास्थ्य विभाग को नही है संज्ञान

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मुख्यमंत्री का बचकाना बयान,विपक्ष फैला रहा डेंगू मच्छरों को श्रीमान

स्वास्थ्य महकमे के पास डेंगू पीड़ितों के आंकड़े उपलब्ध नहीं: दी टॉप टेन न्यूज ने सप्ताह पूर्व किया था खुलासा

दीपक फुलेरा-

दी टॉप टैन न्यूज़(देहरादून)- प्रदेश में डेंगू लगातार महामारी के रूप में फैल रहा है।खुद सूबे की राजधानी इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है।लेकिन इसके बावजूद प्रदेश के मुख्यमंत्री इस बीमारी पर अपने बचकाने बयान से सुर्खियों में है।एक तरफ मुख्यमंत्री जंहा मच्छर सरकार के घर पर पैदा नही होते कहकर अजब बयान देते है। तो दूसरी तरफ एक कदम ओर बढ़कर सीएम साहेब लगातार बढ़ रही डेंगू की बीमारी पर विपक्ष पर आरोप लगाते हुए उनके द्वारा डेंगू के मच्छरों को छोड़े जाने का बचकाना बयान देते नजर आते है।

अब सीएम साहेब को कौन समझाए की डेंगू की बीमारी से निपटने की जिम्मेदारी सरकारी तंत्र की है ना कि किसी और की। एक ओर जंहा लगातर डेंगू के डंक से  प्रदेश की आमजन काल के गाल में समा रही है।वही प्रदेश सरकार का इस बीमारी के विकराल होने तक एक्शन में नही आना भी कई सवाल खड़े करता है।जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट  विपक्ष द्वारा डेंगू बीमारी पर हवा फैलाने की निंदा तो करते है दूसरी तरह प्रदेश की जनता को इस समस्या की रोकथाम को लेकर स्वयं जागरूक होने की बात करते है। लेकिन अध्यक्ष महोदय को शायद ये नही पता कि  किसी भी बीमारी से प्रदेश के जनमानस को जागरूक करने की जिम्मेदारी भी सरकार की होती है। लेकिन धरातल पर डेंगू से बचाव को लेकर सरकार के जागरूकता अभियान का अभी तक पता नही है। सरकार के विकास कार्यो के बड़े बड़े विज्ञापन तो अखबारों में नजर आ रहे है लेकिन डेंगू से बचाव को लेकर कही कुछ दिखाई नही दे रहा है।सरकार की डेंगू पर निष्क्रियता के चलते देहरादून के बड़े बड़े प्राइवेट अस्पताल डेंगू के मरीजो से भरे है। हम आपको बता दे कि इन निजी अस्पतालों के मालिक भी कुछ रसूखदार नेता है। सरकारी अस्पतालों से भी दून के इन बड़े अस्पतालों में डेंगू के मरीजो को भेजने का खेल खेला जा रहा है।इस पूरे खेल में सिर्फ बीमार जनता आर्थिक रूप से पिस रही है।

खुद प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ . आर. के पांडे ने मीडिया से एक दिन पहले  प्रदेश भर में डेंगू की बीमारी से प्रभावित मरीजो के सही आंकड़ों उपलब्ध ना होने बात कही थी। जबकि दी टॉप टैन न्यूज़ ने 9 सितंबर के अपने डेंगू पर लिखे आर्टिकल में पहले ही बता दिया था कि सरकार के पास डेंगू के मरीजो के आंकड़े उपलब्ध नही है। जब सरकार व स्वास्थ्य महकमे के पास इस बीमारी से प्रभावित लोगों के अभी तक सही आंकड़े नही है तो धरातल पर इलाज की किस तरह तैयारी सरकार कर रही होगी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके बावजूद सरकार डेंगू की रोकथाम के दावे कर रही है।अस्पतालों में एलाइजा टेस्ट मुफ्त में किये जाने की बात कही जा रही है। लेकिन इसके बावजूद भी प्रदेश की जनता इस बीमारी से बचने के लिए प्राइवेट अस्पतालों में जाने को मजबूर है। कई रोगी तो प्रदेश के बाहर के अस्पतालों में भी डेंगू का इलाज करवा रहे है। ऐसे हालातो में अगर विपक्ष डेंगू की रोकथाम पर सरकार को फेल बता रहा है तो सरकार को इसमें भी राजनीति नजर आ रही है। फिलहाल डेंगू के डंक से प्रदेश की जनता हलकान है वही प्रदेश के मुखिया लगातार फैल रही इस महामारी पर गम्भीरता से एक्शन लेने की बजाय बचकाने बयान देते नजर आ रहे है।