पत्रकारिता और साहित्य जगत में शोक की लहर
दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून
कोविड19 महामारी ने हमसे इस साल बहुत से बुद्धिजीवियों, कलाकार,साहित्यकार को छीन लिया हैं, जिनके दुनिया से जाने पर लगता है काश ये कुछ साल और रह जाते तो इनकी सृजनशीलता से समाज को कुछ और आयाम मिल पाते।
ऐसे ही हिंदी के प्रख्यात कवि, पत्रकार व उत्तराखंड की शान और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित मंगलेश डबराल का बुधवार को कोरोना वायरस संक्रमण से निधन हो गया. वह 72 वर्ष के थे. करीब 12 दिन पहले कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आए डबराल ने एम्स में आखिरी सांस ली. एम्स में उपचार के दौरान शाम में उन्हें दिल का दौरा पड़ा. डबराल पिछले कुछ दिनों से गाजियाबाद के वसुंधरा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती थे और हालत बिगड़ने के बाद उन्हें उपचार के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था. मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी डबराल जनसंस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे.
डबराल का 1948 में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में जन्म हुआ था. मंगलेश डबराल एक जाने माने पत्रकार भी थे, लेकिन उनका अपना सृजन कविता में था. पहाड़ के विस्थापन के अलावा उन्होंने शहरी जीवन पर काफी लिखा. डबराल के दोस्त और कवि असद जैदी ने फेसबुक पर लिखा, ‘‘मंगलेश डबराल को पांच बजे के करीब डायलिसिस के लिए ले जाया गया. इसके बाद उन्हें दो बार हृदयाघात हुआ.”
डबराल प्रतिपक्ष, पूर्वाग्रह, अमृत प्रभात आदि पत्रिकाओं से जुड़े रहे और लंबे समय तक जनसत्ता में काम किया. उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘नये युग में शत्रु’, ‘हम जो देखते हैं’ आदि शामिल हैं. डबराल को साहित्य अकादमी पुरस्कार के अलावा शमशेर सम्मान, स्मृति सम्मान, पहल सम्मान और हिंदी अकादमी दिल्ली के साहित्यकार सम्मान से सम्मानित किया गया था.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता, हिंदी भाषा के प्रख्यात लेखक, कवि और पत्रकार श्री मंगलेश डबराल के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मंगलेश डबराल के निधन को हिन्दी साहित्य को एक बङी क्षति बताते हुये दिवंगत आत्मा की शांति व शोक संतप्त परिवार जनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।
