वर्दी बदली है, मोर्चा नहीं – अब धरती माँ की रखवाली

दी टॉप टेन न्यूज़/ देहरादून

एक सैनिक की कलम से साथियों, सुबह 6 बजे का खो नदी तट – सरहद पर हमने सर्द रातें बंकर में गुजारी हैं। आज सुबह जब खो नदी के तट पर कुदाल उठाई, तो वही जोश था। फर्क सिर्फ इतना था – आज दुश्मन की गोली नहीं, नदी का कटाव था। आज मोर्चा बर्फीले पहाड़ नहीं, हमारे अपने कोटद्वार की मिट्टी थी। हम सैनिक सोचते कैसे हैं? – एक फौजी के लिए ‘जमीन’ का मतलब नक्शे पर बनी लकीर नहीं होता। जमीन मतलब माँ। हमने कारगिल में देखा है – एक इंच जमीन के लिए जवान शहीद हो जाता है। आज जब खो नदी हर बरसात में हमारे खेत, हमारे घर निगलती है, तो एक सैनिक का खून खौलता है। इसलिए पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार ने 05 मई 2026 को तय किया – अब ‘हरित प्रहरी’ बनेंगे।
हमने पीपल, नीम, शीशम, बांस, आम, अमरूद, कचनार आम के 30 पौधे लगाए। एक फौजी की नजर में ये 30 पौधे नहीं, 30 नई ‘पोस्ट ’ हैं। जैसे सीमा पर हर पोस्ट की रखवाली 24 घंटे होती है, वैसे ही हमने संकल्प लिया – एक साल तक हर पौधे की रखवाली करेंगे। पानी देंगे, जानवरों से बचाएंगे। क्योंकि फौजी का सिद्धांत है: जो जिम्मेदारी ली, वो पूरी की। हमने एक नीम का पौधा मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी साहब के नाम पर लगाया। क्यों? क्योंकि फौज हमें सिखाती है – ‘लीडर को फॉलो करो’। खंडूड़ी साहब ने वर्दी में देश की सेवा की, कुर्सी पर बैठकर देवभूमि की सेवा की । आज जब वो हमारे बीच नहीं हैं, तो उनका नीम का पेड़ नई पीढ़ी को बताएगा – असली जनरल वो है जो रिटायर होकर भी समाज के लिए लड़ता है। यह नीम 100 साल जिएगा। यानी 100 साल तक खंडूड़ी साहब का अनुशासन, उनकी ईमानदारी इस मिट्टी में सांस लेगी। दूसरी ओर प्लास्टिक बनाम ग्रेनेड– हमने नदी तट से प्लास्टिक- पॉलीथिन भी हटाई। एक सैनिक जानता है – ग्रेनेड फटता है तो एक बार नुकसान होता है। प्लास्टिक फटता नहीं, पर 400 साल तक धरती को मारता है। यह ‘स्लो पॉइजन’ है। हमने आज ‘स्वच्छ खो, स्वस्थ कोटद्वार’ का ऑपरेशन लॉन्च किया। दुश्मन बदल गया है, हथियार बदल गया है – अब कुदाल और झाड़ू हमारे हथियार हैं। *फौजी की डिक्शनरी में ‘रिटायरमेंट’ शब्द नहीं* – दुनिया हमें ‘पूर्व सैनिक’ कहती है। पर हमारी ट्रेनिंग कहती है – ‘Once a soldier, always a soldier’ सरहद पर हमने ‘भारत माता की जय’ बोली थी। आज खो नदी के तट पर ‘भारत माता की हरियाली’ का नारा लगा रहे हैं। वर्दी उतर गई, पर कर्तव्य की पट्टी अब भी कंधे पर है। राइफल जमा हो गई, पर *जिम्मेदारी की मैगजीन आज भी फुल है* कभी भी पुकार और फोन करके देख सकते हो।

*पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार का आवाहन है हर घर से एक ‘हरित फौजी’ निकले*
*स्कूल के बच्चे* याद रखो, जो हाथ आज किताब पकड़ता है, वही कल तिरंगा और तसला दोनों उठाएगा। एक पौधा जरूर लगाओ।
युवा डीजे पर नाचना आसान है, ढोल सागर की थाप पर पसीना बहाना मुश्किल है। मुश्किल काम ही फौजी को फौजी बनाता है।
प्रशासन आप हमें एक टैंकर पानी दे दो, हम 30 से 3000 पौधे कर देंगे। क्योंकि फौजी ‘रिसोर्स’ का रोना नहीं रोता, ‘रिजल्ट’ देता है। अब जीत का मतलब होगा – *जब खो नदी का पानी साफ होगा, जब कटाव रुकेगा, जब कोटद्वार की हवा में ऑक्सीजन बढ़ेगी।* इसलिए आज हमारा नारा है–
*”सरहद पर देश बचाया, अब पर्यावरण बचाएंगे।*
*खो नदी के तट पर, हरियाली लहराएंगे।*
*कूड़ा हटाएंगे, जीवन बचाएंगे।”* – क्योंकि फौजी का वादा टूटता नहीं। *वर्दी बदलती है, कर्तव्य नहीं।*
*मोर्चा बदलता है, मिट्टी नहीं।*

“जो कल सरहद का प्रहरी था, वो आज पर्यावरण का प्रहरी है”
इस अवसर पर विशेष आभार गोपाल सिंह, ठाकुर सिंह, जीत सिंह, अनसूया प्रसाद सेमवाल, दिलवर सिंह, शूरवीर खेतवाल, लक्ष्मण सिंह, गिरीश चंदेर, नंदन सिंह मंगल सिंह और कोटद्वार के समस्त पूर्व सैनिक साथी।

जय हिंद
जय उत्तराखंड

महेंद्र
अध्यक्ष
पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार