सन 2017 में विधायकों की खरीद-फरोख्त का है मामला
देहरादून— सन 2017 में उत्तराखंड की राजनीति में एक सियासी भूचाल आया था और उसके शिकार बने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत।
विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में एक बहुचर्चित स्टिंग ऑपरेशन के सामने आने के बाद राज्य में सरकार गिर गई थी और राज्यपाल शासन लागू हो गया था।
तब इस मामले में हो हल्ले के बाद राज्यपाल ने सीबीआई जांच के आदेश जारी किए थे।
तब हरीश रावत ने अपना बचाव करते हुए स्टिंग ऑपरेशन को फर्जी बताया और हाईकोर्ट से सीबीआई द्वारा अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगवा ली थी।
इस मामले में 15 जून 2017 को कैबिनेट बैठक में जिसकी अध्यक्षता इंद्रा हृदेश ने की थी हरीश रावत पर चल रही सीबीआई जांच को हटाकर एसआईटी द्वारा करने का फैसला किया था।
जिसको दल बदलू हरक सिंह रावत ने नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दे दी थी जिसके बाद से इस मामले की जांच सीबीआई कर रही थी।
अब विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में सीबीआई ने बुधवार को नैनीताल हाईकोर्ट में न्यायाधीश आर सी खुल्बे की खंडपीठ में अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है। अब इस मामले की सुनवाई आगामी 20 सितंबर को होनी है।
