नानकमत्ता के सूरज को इंसाफ दिलाने हजारो युवा उतरे सड़को पर
उधम सिंह नगर– नानकमत्ता के सूरज के अभागे माता पिता को तनिक भी भान नही रहा होगा कि रोजगार के सपने लिए घर से निकला उनका बेटा एक लाश बन घर वापस आएगा। राखी का त्यौहार मना 16 अगस्त को आईटीबीपी में भर्ती होने के सपने को लेकर घर से हल्द्वानी निकला सूरज सक्सेना फिर कभी वापस घर नही आ पाया।
16 अगस्त को आईटीबीपी भर्ती स्थल हल्दूचौड़ लालकुंआ में दौड़ में पास होने के बाद टोकन को लेकर आईटीबीपी के जवानों से झड़प होने के बाद से ही सूरज गायब था। सूरज के साथियो को सूरज के भाग जाने की सूचना आईटीबीपी जवानों द्वारा दिए जाने के बाद उसका सामान उन्हें लौटा दिया गया था। जिसके बाद सूरज की गुमसुदगी की खबर जब सूरज के परिजनों को मिली तो उसकी खोज बिन शुरू हो गई।सूरज के पिता व भाई जब सूरज की तलाश में आईटीबीपी कैम्प हल्दूचौड़ पहुँचे तो उन्हें भगा दिया गया।उसके बाद लालकुंआ थाने गुमसुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा सूरज के पिता व भाई सूरज की तलाश में जुट गए।18 अगस्त को सूचना मिली कि सूरज का शव आईटीबीपी के पुराने परिसर की झाड़ियों में पड़ा है।इस मनहूस खबर के बाद सूरज के जिंदा रहने की उमीदें जंहा एक झटके में खत्म हो गई। वही परिजनों द्वारा आईटीबीपी जवानों पर सूरज की हत्या किए जाने का शक ओर गहरा गया। लालकुंआ कोतवाली में आईटीबीपी के अज्ञात जवानों के खिलाफ हत्या का जंहा सूरज के पिता व भाई ने मुकदमा दर्ज करवा दिया है। वही उदय होने से पहले अस्त हो चुके सूरज की मौत के बाद परिजनों,युवाओ व नानकमत्ता की जनता का आक्रोश लालकुंआ से लेकर नानकमत्ता तक सड़को पर दिखने लगा।
आईटीबीपी जवानों पर हत्या के आरोप व न्याय की मांग
नानकमत्ता के सूरज सक्सेना की मौत के बाद लगातार जंहा लालकुंआ से लेकर नानकमत्ता में प्रदर्शन हो रहे है वही सूरज के हत्याओं को जल्द पकड़ने की मांग भी जोर पकड़ती जा रही है। परिजनों द्वारा आईटीबीपी के जवानों पर उनके बेटे की हत्या का आरोप लगाया जा रहा है। सूरज के परिजनों की इस आशंका के पीछे मुख्य वजहें भी है जो कि सूरज की मौत के पीछे कहि ना कहि एक साजिश की ओर इशारा करती है। सूरज का भर्ती में आईटीबीपी जवानों से विवाद,जवानों द्वारा सूरज को बुरी तरह पीटा जाना व उसके बाद उसके भर्ती स्थल से भागे जाने की सूचना सूरज के साथियो को दे उसका बैग व सामान वापस कर देना। ये सारा घटना क्रम सूरज के साथियो द्वारा ही सूरज के घर पर बताया गया है।अब बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर सूरज का शव दो दिन बाद आईटीबीपी परिसर में ही कैसे मिला। आखिर कैसे उसकी मौत हुई।क्यों मामूली विवाद पर सूरज को आईटीबीपी जवानों द्वारा बुरी तरह मारा गया। ये कई सवाल है जिसे नैनीताल पुलिस को ढूंढना है। हालांकि खुद नैनीताल के एसएसपी अब इस मामले की जांच में जुट चुके है साथ ही डीएम नैनीताल सविन बंसल ने इस मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए है।लेकिन इस अभागे युवा बेरोजगार जिसे रोजगार के बदले मौत मिली हो उसे न्याय दिलाने को पुलिस व जिला प्रशासन को पूरी साफगोई के साथ न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा। इस हत्याकांड के खुलासे में देरी कही ना कहीं युवाओ में उबाल व आक्रोश ला सकती है।
भर्ती के दौरान युवाओ के साथ अमानवीय व्यवहार आखिर कब तक
सूरज भले ही रोजगार के सपने लिए इस दुनिया से रुखसत हो गया हो लेकिन सूरज की मौत आज आर्मी या अन्य पैरा मिलेट्री फोर्सेज की भर्ती के दौरान युवाओं के साथ भर्ती अधिकारियों या कर्मियों द्वारा किये जाने वाले अमानवीय व्यवहार पर प्रश्न चिन्ह खड़े कर गई है। की आखिर रोजगार के नाम पर आयोजित इन मेलों में युवा बेरोजगारों के साथ मारपीट का अधिकार इनको किसने दिया। इन भर्तीओ के दौरान युवा बेरोजगारों के साथ गालियां,अभद्र व्यवहार,मारपीट के हजारों किस्से हमे भर्ती में गए बेरोजगारों से सुनने को मिल जाते है। क्या देश मे चल रहे इस भर्ती सिस्टम में शामिल लोगों को ये सिखाने की जरूरत नही की तमाम तमाम परेशानियों,भूखे प्यासे भर्ती पर पहुँचे उन युवाओं के साथ मानवीय व सम्मानित व्यवहार किया जाए।देश भर में होने वाली फोर्सेज की भर्तियों में अगर भर्ती अधिकारी युवाओ के प्रति सम्मानित व्यवहार कर रहे होते तो आज देश सेवा कर रहे आईटीबीपी के जवानों पर सूरज की हत्या का ना आरोप लगा होता ओर ना ही उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कोई जहमत उठाता। लेकिन कही ना कहि देश के युवाओं को सम्मान देने की आवश्यकता है। क्योंकि वही देश के भावी कर्णधार है।
