अल्मोड़ा के एस एस जे विश्व विद्यालय परिसर में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 126वीं जयंती मनाई गई

 

दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून

अल्मोड़ा-आज अल्मोड़ा के एस एस जे विश्व विद्यालय परिसर में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 126वीं जयंती मनाई गई ( जन्म 23जनवरी 1897) सर्वप्रथम विश्व विद्यालय परिसर में उनकी मूर्ति में अल्मोड़ा के विधायक मनोज तिवारी, विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो जे एस विष्ट व इतिहास विभाग के विभागध्यक्ष प्रोफ़ेसर बी डी एस नेगी सहित कर्मचारियों व विभागाध्यक्षों ने नेताजी की प्रतिमा में माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। तत्पश्चात नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का आजादी पर योगदान” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विधायक मनोज तिवारी व विशिष्ट अतिथि कुलपति (नव नियुक्त) प्रोफसर जे एस विष्ट थे । संगोष्ठी में अनेक वक्ताओ ने नेताजी के व्यक्तित्व व, उनका आज़ादी में योगदान पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि आज सम्पूर्ण राष्ट्र नेताजी की जयंती मना रहा है उन्होंने जय हिंद का नारा दिया और तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा देकर आजादी की अलख जगाई। देश को अंग्रेजो के चंगुल से छुड़ाकर आजाद कराया।उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढी को उनके पदचिन्हों पर चल कर प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष्य प्रोफेसर बी डी एस नेगी ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती पराक्रम दिवस के रुप में आज पूरे देश में मनाई जा रही है। नेताजी का सबसे बड़ा योगदान आज़ादी के लिए है, उन्होंने आज़ाद हिंद फौज का गठन किया और विश्व के एक दर्जन देशों ने आज़ाद हिंद फौज को मान्यता भी दी। 1942में नेताजी ने आज़ाद हिंद फ़ौज की बड़ी संख्या जुटा ली थी उसके बाद भारत छोड़ो आन्दोलन शुरु हुआ। नेताजी नहीं होते तो आजादी भी नहीं मिलती देश को आजाद कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है ।

उन्होंने कहा कि आजाद हिंद फौज की स्थापना। भारत को स्वतंत्र घोषित कराना, और विश्व के अनेक देशों से आज़ाद हिंद फौज को मान्यता दिलाने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा।एस एस जे विश्व विद्यालय परिसर के कुलपति प्रोफसर जे एस विष्ट ने स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी का बहुत बड़ा योगदान रहा। उनका देश के लिए त्याग और अनुशासन आज भी प्रेरणास्पद है।

बाइट प्रोफसर जे एस विष्ट कुलपति एस एस जे विश्व विद्यालय परिसर।

रिपोर्ट कंचना पांडेय अल्मोड़ा।

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