दीपक फुलेरा
देहरादून- एक तरफ जंहा प्रदेश व केंद्र सरकार उत्तराखण्ड को सड़क व वायु मार्ग से जोड़ने को लेकर संजीदा दिख रही है। वही पहाड़ो में रेल चलने के सपने को अभी भी पहाड़ के लोग देखने को मजबूर है। उत्तराखण्ड के पहाड़ो पर रेल चढ़ाने की हसरत दिल में लिए इस बार बलूनी रेल मंत्री पीयूष गोयल से उत्तराखण्ड के लिए ऐतिहासिक घोसणा करवाने में सफल हुए है। राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने टनकपुर बागेश्वर की दशकों पुरानी मांग को जेहन ने रखते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल से टनकपुर से बागेश्वर,बागेश्वर से चौखुटिया,चौखुटिया से गैरसैंण, व गैरसेंण से कर्णप्रयाग रेल लाइन के सर्वे की स्वीकृति रेल मंत्रालय से प्राप्त की है।
अनिल बलूनी सदैव उत्तराखण्ड जनमानस के जनहित के मुद्दों को प्रमुखता के साथ पूरा करवाने का काम कर रहे है। जिस तरह उन्होंने अब रेलमार्ग के पहाड़ो में निर्माण को लेकर सार्थक कदम उठाते हुए इस विषय मे पहली सफलता प्राप्त की है। उससे अब उम्मीद जगी है कि पुनः सर्वे की रेलगाड़ी को पहाड़ी मार्गो में दौड़ा पहाड़ में रेल के सपने को उन्होंने एक बार फिर उड़ान दी है।
उत्तराखण्ड में एक ओर जंहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल मार्ग निर्माण को लेकर भूमि हस्तांतरण,सर्वे व प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। वही राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने टनकपुर बागेश्वर,बागेश्वर चौखुटिया, चौखुटिया गैरसेंण व गैरसेंण से कर्णप्रयाग तक रेल मार्ग निर्माण को लेकर भगीरथ प्रयास शुरू कर दिए है। जिसके तहत बलूनी ने रेल मंत्री से इन मार्गो की सर्वे स्वीकृति रेल मंत्रालय से प्राप्त कर ली है। साथ ही अगर बलूनी के प्रयासों से दशकों पुरानी टनकपुर बागेश्वर रेल मार्ग के साथ ही अन्य रेल मार्गो पर भी बलूनी काम करवाने में सफल हो जाते है। निश्चित ही कहा जा सकता है यह रेल पहाड़ के पर्यटन व्यवसाय व रोजगार के क्षेत्र में एक बेहतरीन कल को तैयार करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।साथ ही उत्तराखण्ड में सड़क व हवाई यात्रा के बाद अब ट्रेन लाइन निर्माण के क्षेत्र में सार्थक पहल उत्तराखण्ड प्रदेश के सीमावर्ती अंचलों के कायाकल्प करने में जरूर सहायक सिद्ध होंगी।

