राज्य सभा सांसद बनते ही बलूनी ने अपनी विकासवादी सोच को राज्य की जनता के सामने रखा
बलूनी ने केंद्र सरकार में अपनी मजबूत पकड़ का सियासी हलकों में कराया एहसास
देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य से युवा सांसद व राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी राजनीति के चमकते सितारे के रूप में प्रदेश की जनता के सामने आये है। सबसे कम उम्र में उत्तराखण्ड से राज्य सभा सांसद बन बलूनी ने अपनी राजनीतिक पकड़ का एहसास सियासी गलियारों में करा डाला है।वही मार्च 2018 में राज्यसभा सांसद बनते ही उन्होंने उत्तराखण्ड के विकास को लेकर अपनी विकासवादी सोच का रोल मॉडल एक के बाद एक जनहित के कार्य करवा जनता के सामने रख दिया है।जिसके चलते उन्हें उत्तराखण्ड के राजनीतिक भविष्य के नेता के तौर पर भी देखा जाने लगा है।
वही बात अगर अनिल बलूनी के राजनीतिक कैरियर की करे तो युवा अवस्था से ही राजनीति में सक्रिय अनिल बलूनी हाईप्रोफाइल राजनीतिक बैकग्राउंड से नही आते है। बलूनी दिल्ली में अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही छात्र राजनीति में सक्रिय थे। शुरू से ही संघ परिवार से जुड़ाव के चलते अक्सर बलूनी का संघ दफ्तर में आना जाना लगा रहता था।इसी दौरान बलूनी का संघ के जाने माने नेता सुंदर सिंह भंडारी के साथ जुड़ाव हुआ। भंडारी भी बलूनी के सौम्य व्यवहार व प्रतिभा से के चलते उन्हें पसंद करते थे। वही जब सुंदर सिंह भंडारी को तत्कालीन सरकार ने बिहार का राजयपाल बनाया तो वो बलूनी को अपने साथ ओएसडी( आफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) बनाकर पटना ले गए। उसके बाद भंडारी को गुजरात का राज्यपाल बनने पर बलूनी को उनके साथ गुजरात मे भी उनके साथ ओएसडी के रूप रहने का अवसर मिला।इस दौरान बलूनी अपनी राजनीतिक प्रतिभा के दम पर तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के भी करीब आये।लेकिन उत्तराखण्ड से बलूनी के जुड़ाव ने उन्हें 2002 में वापस उत्तराखण्ड आने को मजबूर कर दिया।
मूल रूप से उत्तराखण्ड के पौड़ी जिले के नकोट गांव में जन्मे अनिल बलूनी ने 26 साल की उम्र में जंहा राजनीति में सक्रिय हो गए थे। वही 2002 के विधानसभा चुनाव अनिल बलूनी ने कोटद्वार विधानसभा से अपना पर्चा भरा लेकिन किन्ही कारणों से उस समय उनका नामांकन पर्चा निरस्त हो गया। जिसके खिलाफ वो कोर्ट गए व पुनः सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर 2004 के कोटद्वार उप चुनाव में बलूनी ने चुनाव लड़ा। लेकिन उस समय हार के साथ उन्हें पहली राजनीतिक विफलता मिली। लेकिन बलूनी ने अपनी विफलता को अपनी सफलता का मूल मंत्र बना वह पुनः पूरी सिद्दत के साथ राजनीति में सक्रिय हो गए।
जिसके बाद बलूनी को निशंक सरकार में वन्य जीव बोर्ड का उपाध्यक्ष बना राज्य मंत्री का प्रभार मिला।जिस पर बलूनी ने उस दौरान भी पूरे राज्य में वन जीव संरक्षण के क्षेत्र में बखूबी काम कर अपनी राजनीतिक क्षमता को सबके सामने रखा।उनकी इसी क्षमता को देखते हुए भाजपा संगठन ने राष्ट्रीय प्रवक्ता फिर राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख की अहम जिम्मेदारियों से नवाजा गया।उत्तराखण्ड से भाजपा के युवा चेहरे के तौर पर भी बलूनी का 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद संभावित मुख्यमंत्री के दावेदारों के रूप में नाम सामने आया था। भाजपा संगठन में अपनी मजबूत पकड़ व नरेंद्र मोदी के करीबी होने के चलते उत्तराखण्ड के इस युवा चेहरे को वर्ष 2018 राज्य सभा चुनाव में तमाम वरिष्ठ चेहरों पर तरजीह देते हुए राज्यसभा का प्रत्यासी बनाया गया।जिस पर विजय हो मार्च 2018 में अनिल बलूनी सबसे कम उम्र के राज्यसभा सांसद बन गए।
मार्च 2018 में राज्य सभा सांसद बनने के बाद जिस तरह बलूनी ने बहुत कम समय मे जनहित के कार्यो को केंद्र सरकार से मंजूर करवा उत्तराखण्ड की जनता को उसका लाभ दिलवाने का काम किया है ।उससे साफ तौर पर उन्होंने जन नेता बनने की ओर अपनी शुरुवात कर दी है। राज्य सभा सांसद बनते ही बलूनी ने सबसे पहले राज्य के पर्वतीय इलाकों में होने वाली भीषण सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए हर जिले में अपनी तरफ से आईसीयू का निर्माण कराए जाने की घोषणा की। जिस पर बलूनी द्वारा काम भी शुरू कर दिया गया। ताकि लोगो को दुर्घनाओं की स्थिति में पहाड़ो में ही समुचित इलाज मिल पाए।साथ ही बलूनी ने उत्तराखण्ड राज्य के स्वास्थ्य व्यवस्था के हालात व डॉक्टरों की कमी को देखते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण व ग्रह मंत्री राजनाथ सिंह से मिल राज्य की जनता को आर्मी व अर्ध सैनिक बलो के अस्पतालों में इलाज दिए जाने की सैद्धान्तिक सहमति दिलवाई। बलूनी के प्रयासों से अब राज्य को जनता को अब सैनिक अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं का लाभ भी मिल पायेगा।वही अनिल बलूनी ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से मिल देहरादून टू हल्द्वानी नैनी दून जन शताब्दी एक्सप्रेस नई रेल सेवा की शुरुवात कर राज्य की जनता को एक नई ट्रेन सेवा की सौगात दी। जिससे कुमाऊं से राजधानी दून आने के लिए कुमाऊं की जनता को रेल सेवा का लाभ मिल पाए।वही बलूनी ने पलायन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भी अपना ध्यान आकर्षित कर पौड़ी जनपद के दुगट्टा ब्लॉक के गैर आबाद गांव बौर को गोद लेने का फैसला लिया। बलूनी द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस गांव को गोद लिया गया है। इसके बाद उत्तराखण्ड के अन्य गैर आबाद गांवों को भी आबाद करने के प्रयास किये जायेंगे। साथ ही अनिल बलूनी उत्तराखण्ड में शिक्षा व रोजगार के अवसर पैदा करने साथ ही सूबे से पलायन की रोकथाम को लेकर विस्तृत कार्ययोजना को तैयार करने में लगे है।
जिस तरह राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी मोदी सरकार के करीबी होने का लाभ राज्य की जनता को दे रहे है। उससे व केंद्र व राज्य के बीच उस विकास के सेतु का काम कर रहे है जिससे राज्य के विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके।
सांसद अनिल बलूनी की कार्यप्रणाली राजनीतिक क्षमता, स्वच्छ छवि व भाजपा संगठन में मजबूत पकड़ उन्हें उत्तराखण्ड के अगले राजनीतिक सितारे के रूप में स्थापित कर रही है। बलूनी उत्तराखण्ड में भाजपा के युवा नेता के रूप में जंहा जनता के बीच मे स्थापित हो रहे है।वही अगले जननेता के रूप अनिल बलूनी ने उत्तराखण्ड की सियासत में अपनी उपस्थिति भी दर्ज करा दी है। वो दिन दूर नही जब अनिल बलूनी केंद्र के मनपसंद उत्तराखंडी नेता के रूप में केंद्र सरकार व राज्य में अपना नेतृत्व देते हुए नजर आए।

