देहरादून में ‘नेताओं के रूप में मानवाधिकार और लोकतंत्र में महिलाएं एक पथ प्रदर्शक’ विषय पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ संम्पन्न

नीता कांडपाल

दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून

देहरादून सूर्यलोक कॉलोनी राजपुर रोड में ‘नेताओं के रूप में मानवाधिकार और लोकतंत्र में महिलाएं एक पथ प्रदर्शक’ विषय पर 21 और 22 जनवरी को दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया सेमिनार के दूसरे दिन प्रथम सत्र में एडवोकेट लता राणा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा महिलाओं को मुफ्त कानूनी सहायता तथा घरेलू हिंसा के विषय में जानकारी दी गई उन्होंने कहा कि महिलाएं और पुरुष दोनों को अपने परिवार में सामंजस्य बना कर चलना चाहिए घरेलू हिंसा का शिकार सिर्फ महिलाएं ही नहीं होती बच्चे और बूढ़ी महिलाएं भी इसमें शामिल है चर्चा के दौरान उन्होंने मुफ्त कानूनी सहायता के अंतर्गत फार्म भरने की प्रक्रिया पर चर्चा की इसके साथ जेल में महिला कैदी निशुल्क विधि सहायता कैसे प्राप्त करें इस पर भी चर्चा हुई। विमला गौड़ पार्षद खुडबुड़ा ने पूछा कि सबूत ना होने पर महिलाओं को क्या करना चाहिए । ग्राम प्रधान लीला शर्मा ने कहा कि पीड़िता के केस की स्थिति के विषय में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकर्ता को जानकारी लेते रहना चाहिए ममता देवरानी ने सुझाव दिया कि इस प्रकार के सेमिनार पुलिस विभाग के साथ भी होने चाहिए ताकि हमें अपने क्षेत्र की समस्याओं को उनके सामने रखने का मौका मिल सके।


विमला मक़लोगा राज्य समन्वयक महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र की नीव गांव है महिलाएं दोहरी जिम्मेदारी निभाती हैं उन पर कोई अत्याचार होता है तो उन्हें सिस्टम के खिलाफ अपनी आवाज उठानी चाहिए परिवार में लड़के लड़कियों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं पर भी चर्चा की सेमिनार के अंतिम सत्र में पैनल पर चर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने पार्टी सिंबल पर चुनाव ना होकर सीधे जनता द्वारा किया जाना चाहिए और विधानसभा संसद नगर निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया जाना चाहिए, पार्षद के मानदेय की व्यवस्था होनी चाहिए, युवकों में नशे की आदत को रोकने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए।
अंत में महिला फोरम का गठन किया गया और यह तय किया गया की यह फोरम उपरोक्त मुददो के लिए कार्य करेगा।