दी टॉप टेन न्यूज़
देहरादून।उत्तराखंड क्रांति दल के आह्वाहन में रविवार को जिला पंचायत भवन, देहरादून में ‘मंथन 2027 — क्षेत्रीय एकता से उत्तराखंड का राजनीतिक विकल्प’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उत्तराखंड के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, राज्य आंदोलनकारियों तथा विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। बैठक का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय राजनीतिक शक्तियों के बीच एकजुटता, संभावित गठबंधन, साझा न्यूनतम कार्यक्रम और संयुक्त चुनावी रणनीति की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना रहा।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि उत्तराखंड की मूल अवधारणा, क्षेत्रीय अस्मिता, स्थानीय जनता के अधिकारों और प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने के लिए क्षेत्रीय दलों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर संवाद और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना होगा। आगामी विधानसभा चुनावों में एक सशक्त क्षेत्रीय राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करने के उद्देश्य से साझा मुद्दों पर सहमति बनाने और गठबंधन की संभावनाओं को तलाशने पर विशेष चर्चा हुई।
बैठक में मूल निवास, सशक्त भू-कानून, जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय जनता के अधिकार, पलायन, बेरोजगारी, परिसीमन और उत्तराखंड के संसाधनों पर प्रदेशवासियों के अधिकार जैसे विषयों को साझा राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता देने की आवश्यकता पर विचार किया गया।
क्षेत्रीय दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने किया प्रतिभाग
कार्यक्रम में उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक कर्नल (सेवानिवृत्त) सुनील कोटनाला, कार्यकारी अध्यक्ष कुंदन बिष्ट, उपाध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट, उपाध्यक्ष समीर मुंडेपी, महामंत्री कर्नल (सेवानिवृत्त) कैलाश देवरानी, महामंत्री देवचन्द्र उत्तराखंडी, मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया, आईटी प्रकोष्ठ के कार्यकारी अध्यक्ष संजय सिल्सवाल, अर्धसैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष कर्नल सेवानिवृत्त सुनील चौहान, कोषाध्यक्ष सैनिक प्रकोष्ठ श्री रघुनाथ सिंह,केंद्रीय
प्रवक्ता प्रमोद काला तथा विधिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राकेश बिंजोला उपस्थित रहे।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की ओर से प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन नेगी, देहरादून जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, महासचिव राम खंडूरी एवं सतेंद्र ने प्रतिभाग किया। पूर्व सैनिक अर्धसैनिक संयुक्त सैनिक संगठन की ओर से प्रकाश थपलियाल, उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल तथा सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल भी उपस्थित रहे।
क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की ओर से उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के उपाध्यक्ष कुलदीप मधवाल एवं जगदीश ममगाईं, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के महासचिव राजेंद्र भट्ट एवं परवादून जिलाध्यक्ष शिशपाल पोखरियाल, राष्ट्रीय रिजनल पार्टी के देहरादून जिलाध्यक्ष नवीन पंत एवं सुभाष नौटियाल, उत्तराखंड समानता पार्टी के लक्ष्मी प्रसाद रतूड़ी तथा मीडिया प्रभारी वीके धस्माना,
हिमालय क्रांति पार्टी के आशुतोष कोठारी और
उत्तराखंड विकास पार्टी के आशीष बिष्ट ने सहभागिता की।
इसके अतिरिक्त देवभूमि फाउंडेशन के शिवानंद लखेड़ा, पहाड़ स्वाभिमान सेना के अध्यक्ष पंकज उनियाल, गढ़-कुमाऊं एलायंस के कनिष्क जोशी एवं अंशुल रतूड़ी तथा कोटद्वार बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष नगेंद्र प्रसाद उनियाल सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आगामी विधानसभा चुनावों में गठबंधन की संभावनाओं पर जोर
बैठक में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर संवाद और समन्वय की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। इस बात पर विचार किया गया कि उत्तराखंड के हितों से जुड़े मुद्दों पर साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार कर क्षेत्रीय शक्तियां आगामी विधानसभा चुनावों में एक प्रभावी राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
प्रतिभागियों के बीच इस विषय पर भी विचार-विमर्श हुआ कि क्षेत्रीय दल अपनी संगठनात्मक पहचान और स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए साझा मुद्दों पर एकजुटता विकसित करें। इसके लिए आपसी विश्वास, निरंतर संवाद, समन्वय और व्यावहारिक चुनावी रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम में इस बात को रेखांकित किया गया कि उत्तराखंड की जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने और राज्य आंदोलन की मूल भावना को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय राजनीतिक शक्तियों का संवाद समय की आवश्यकता है। मूल निवास, भू-कानून, रोजगार, पलायन और स्थानीय संसाधनों से जुड़े सवालों को केंद्र में रखकर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।उत्तराखंड क्रांति दल ने क्षेत्रीय दलों एवं जनसंगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता को प्रदेश के राजनीतिक भविष्य पर सार्थक संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम के माध्यम से आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर क्षेत्रीय एकता, गठबंधन की संभावनाओं और उत्तराखंड केंद्रित साझा राजनीतिक विकल्प पर चर्चा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।

