दी टॉप टेन न्यूज़
कोटद्वार : गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार की सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हर वर्ष पांच हजार से अधिक नए दोपहिया और चौपहिया वाहन शहर की सड़कों पर उतर रहे हैं। लेकिन, पार्किंग की बात करें तो आज भी बाजार में वाहनों के लिए कहीं पार्किंग व्यवस्था नहीं है। नतीजा, सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहन यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। विडंबना यह है कि पार्किंग स्थल चिह्नित करने के लिए करीब तीन माह पूर्व विभिन्न विभागों की टीम गठित की गई थी, जिसे एक सप्ताह में स्थल चयन करने का जिम्मा दिया गया था, लेकिन टीम की कवायद अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई।
शहर में शायद ही कोई ऐसा मुख्य मार्ग या राष्ट्रीय राजमार्ग हो जहां आपको सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहन न दिखाई दें। पार्किंग के अभाव में सड़क किनारे खड़े यह वाहन जहां जाम का कारण बन रहे हैं। वहीं, राह चलते लोगों को भी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। सबसे बुरी स्थिति अस्पताल, बैंक, डाकघर व अन्य बड़े संस्थान के बाहर बनी रहती है। सरकारी सिस्टम सड़क किनारे नो पार्किंग के नाम पर वाहनों का चालान तो कर देता है। लेकिन, आज तक इन वाहनों के लिए कहीं भी पार्किंग व्यवस्था नहीं बनाई गई है। करीब तीन माह पूर्व स्थानीय लोगों ने महापौर शैलेंद्र सिंह रावत को समस्या से अवगत करवाया था, जिसके बाद नगर निगम, राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग, यातायात पुलिस व प्रशासन की विशेष टीम गठित की गई। टीम ने दो दिन तक शहर के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर एक सप्ताह में पर्किंग स्थल चिह्रित करने की बात कहीं। लेकिन, कई माह बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
कई बार हो चुके हैं प्रयास
शहर में पार्किंग स्थल चिह्नित करने के लिए पूर्व में भी कई बार प्रयास हो चुके हैं। कुछ वर्ष पूर्व झंडाचौक के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग के बीच स्थान को पार्किंग के रूप में तब्दील कर दिया गया था। लेकिन, इसके बाद हाईवे पर जाम की स्थिति बननी शुरु हो गई थी। नतीजा, चंद माह में ही यह व्यवस्था भी खत्म हो गई। वहीं, करीब चार वर्ष पूर्व नगर निगम ने हाईवे के किनारे स्थनों को पार्किंग स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। इसके लिए प्रेक्षागृह के निचले हिस्से को भी पार्किंग स्थल बनाने की योजना बनाई गई। बाकायदा उक्त स्थानों पर पार्किंग शुल्क भी चस्पा किया गया। लेकिन, यह योजना भी रंग नहीं ला पाई।यह हो रही समस्या
सामान्य दिनों में तो फिर भी शहरवासी जाम की चुनौती को झेल लेते हैं। लेकिन, शादी या त्योहार सीजन में स्थिति विकराल हो जाती है। बेतरतीब तरीके से खड़े वाहनों के कारण लोगों का सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। साथ ही हर समय दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। सबसे बुरी स्थित कौड़िया से झंडाचौक, झंडाचौक से बुद्धा पार्क, देवी रोड, स्टेशन रोड, मानपुर रोड में बनी हुई है।

