दी टॉप टेन न्यूज़/ देहरादून
सरकारी काम की जिम्मेदारियां निभाते हुए अपने गांव की यादों पर एक स्मारिका लिखना बहुत प्रेरणादायक कार्य है। इस तरह की स्मारिका दर्शाती हैं। लोग अपने पेशेवर जिम्मेदारियां के साथ-साथ अपने व्यक्तिगत जुनून और रचनात्मकता को कैसे पोषित कर सकते हैं। मूल रूप से जौनसार भाबर गांव कोरूवा के रहने वाले और कोटद्वार में राज्य कर अधिकारी के पद पर तैनात सुल्तान तोमर ने अपनी गांव की यादों धीरे-धीरे विलुप्त होती संस्कृति खाली होते गांवों ने झकझोर कर रख दिया। इसी पीड़ा ने मुझे इस (अपनी विरासत) नाम की स्मारिका लिखने के लिए प्रेरित किया।
बता दें लेखक सुल्तान तोमर ने इस पुस्तिका को स्वर्गीय श्रीमती सामो देवी को समर्पित करते हुए। बंजर खेती बेरोजगारी के कारण खाली होते गांवों जिस कारण उत्तराखंड की संस्कृति बोली भाषा पर भी संकट आन पड़ा है। इस समस्या से कैसे निपटा जाए लेखक मैं अपनी लेखनी से इन सभी समस्याओं को बड़ी खूबसूरती से उकेरा है।
