बहुमुखी प्रतिभा की धनी भारती आनंद ‘अनंता’ को मिला पांचवा हिमालयी नारी सम्मान-2023

दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून

देहरादून-अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के क्रम में भारती आनंद ‘अनंता’ को उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र यूसर्क देहरादून और दिव्यहिमगिरि के संयुक्त तत्वावधान में पांचवा हिमालयी नारी सम्मान-2023 दिया गया।

भारती आनंद ‘अनंता’ लेखन के क्षेत्र में एक स्थापित नाम है। वह पिछले 20 सालों से शिक्षण प्रशिक्षण के साथ-साथ लेखन की नई विधा को आयाम दे रही है। पिछले वर्षों राष्ट्रीय फलक पर प्रकाशित हो चुकी साढे सात सौ पृष्टो की हाईकु कोष और स्वप्नों की सेल्फी जैसे पुस्तकों में भारती आनंद के आधा दर्जन से भी अधिक हाइकु कविता प्रकाशित हुई है। जिसमे देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारो के हाईकु कविताएं प्रकाशित हैं। यही नहीं उन्होंने लिखने की परंपरा को एक नया आयाम दिया है।

तुकांत और अंतिम लाइन का कोई अर्थ न हो उसको हटाकर प्रत्येक शब्द और लाइन का एक संदेश हो, ऐसी नई कविता को भारती आनन्द प्रकाशित कर रही है व लिख रही है। इनकी कविता, आलेख व हाईकु कविता में महिला अधिकारो की पुरजोर वकालत है। ऐसी नई कविता की लेखिका भारती आनंद ‘अनंता’ को इस दौरान उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र युसर्क और दिव्य हिमगिरी संस्था के संयुक्त तत्वाधान में ‘हिमालय नारी शक्ति सम्मान’ से सम्मानित किया गया है।

यह सम्मान जिस तरह से प्रस्तुत हुआ उससे ऐसा आभास होता है कि भारती आनंद ‘अनंता’ के साथ अन्य सृजनात्मक महिलाओं को भी जिन्होंने अपने अपने कार्यों में अद्भुत मिसाल कायम की है ऐसी दो दर्जन महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के क्रम में संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम देहरादून में यह सम्मान उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र द्वारा दिया गया है।

कौन है भारती आनंद ‘अनंता’

भारती आनंदा सुदूर उत्तरकाशी के नौगांव विकासखंड की निवासी है। पिछले 14 साल तक उन्होंने हरिद्वार के एक पिछड़े क्षेत्र में स्वयं सेवी के रूप में किशोर और किशोरियों को नई तालीम की शिक्षा दी है। यही नहीं उन्होंने लगभग 1000 महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए स्वरोजगार के गुर सिखाए है। इसके अलावा उन्होंने तीन साल तक विधवा, पीड़ित और एकल महिलाओं को भी स्वरोजगार जैसे सिलाई, कढ़ाई कार्यों का प्रशिक्षण दिया है। हालांकि मौजूदा वक्त में 1000 महिलाएं इस प्रशिक्षण के पश्चात अपना कार्य निरन्तर नहीं रख पाई। मगर 100 से अधिक महिलाएं इस प्रशिक्षण के पश्चात अपने-अपने घरों में स्वरोजगार कमा रही है। भारती आनंद अनंता एक तरफ लेखन का काम करती है दूसरी तरफ उन महिलाओं को संबल भी देती है। जो महिलाएं अपनी जीवन की सीढ़ियां हार चुकी होती है। वह उनकी समस्या के निदान के लिए खड़ी हो जाती है और हर वक्त उनका हौसला बढ़ाती है, उन्हें आगे चलने की राह दिखाती है। यह वह महिलाएं हैं जिनके अंदर हुनर और सृजन की ताकत कूट-कूट कर भरी है।
वर्तमान में भारती आनंद उत्तराखंड की एक लोक भाषा ‘रवांल्टी’ पर काम कर रही है, साथ ही आने वाले दिनों में वे इस लोक भाषा का व्याकरण और शब्दलिपी पाठकों के सामने लाएगी, जिस पर उनका अध्ययन जारी है। भारती आनन्द की सृजनशीलता को देखते हुए और उनके नए-नए विजन और मिशन को देखते हुए कि वे महिलाओं को संबल बना रही है, महिलाओं को मानव अधिकारों के प्रति सजग कर रही है और स्वाबलंबन दिशा में उन महिलाओं का रास्ता नियत रूप से अख्तियार कर रही है को उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र भारत सरकार की वैज्ञानिक संस्था ने उन्हे ‘हिमालय नारी शक्ति सम्मान’ से नवाजा है

इस माटी की सौंधी को लेकर चलती है उनकी कलम

जब उसकी आंखें खुली तो वह भारती थी। उसकी मां ने ही बड़े लाड-प्यार से उसका नाम भारती रखा है। उसके माथे की चमक को देखते हुए गांव-घर मे जो भी भारती को देखता है वह यही कहता था कि यह बच्चा तुम्हारा नाम रोशन करेगा। परिस्थितयां ऐसी बदली की भारती अपने भाई बहनों में सबसे बड़ी थी और सभी जिम्मेदारियां भारती के ऊपर आ गयी। खैर जिम्मेदारियों को निभाते निभाते उसका सफर थोड़ा लंबा हो गया, मगर वह उस मुकाम तक पहुँचने के लिए जी तोड़ मेहनत करती रही। एक लंबे सफर के बाद वह आज एक स्थापित कवियत्री, संचालक, उद्घोषिका और अध्येता है।

बता दें कि जिस जगह पर भारती का जन्म हुआ वह क्षेत्र विकास से कोसो दूर था। जहां नई शिक्षा, नया अन्वेषण या यह भी कह सकते है कि अक्षर ज्ञान के अलावा यहां के लोगों को दूर दूर तलक वास्ता नहीं था। ऐसे में देश-दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा में खड़ा होना ही बड़ी बात थी। अर्थात सीमांत जनपद उत्तरकाशी के यमुनाघाटी की हालात कुछ ऐसी ही थी। मगर भारती का सपना था कि भले वह पारिवारिक जिम्मेदारों के बोझ तले दबी है पर अपनी प्रतिभा को वह एक दिन साबित कर देगी। यही वजह है कि आज भारती यमुनाघाटी यानी रवांई क्षेत्र की पहली रेडियो उद्घोषिका, पहली कवियत्री है। अर्थात उनकी संघर्ष की कहानी के छोर का अंत अब तक नही हुआ है।

उल्लेखनीय हो कि जिस क्षेत्र में कभी महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकलना मुनासिब नही था आज वहां की नौजवान शिक्षित युवतियां नए नए कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है। उन्ही में से भारती भी एक है। उत्तरकाशी के नौगांव विकासखंड अंतर्गत मुंगरा गांव निवासी भारती की संघर्ष की कहानी यही नहीं रुकती है। उनके संघर्ष के पड़ाव महिला सशक्तिकरण की एक जीती-जागती तस्वीर है। कॉपी, पेंसिल और स्याही के लिए रात भर सपना बुनना और अगली सुबह अपने और अपने भाई बहनों के लिए इन खर्चो का जुगाड़ करना उनकी मेहनत को दर्शाता है। परिवार की जिम्मेदारी के साथ साथ खुद के लिए समय निकालना ही भारती एक उदाहण है। अब भारती ने जैसे होश संभाला वैसे पढ़ाई के साथ साथ अपने पिता से सिलाई जैसे हुनर को अपना लिया। वे अपने आप और भाई बहनों को पढ़ाती रही और घर बैठे सिलाई कार्य करके स्कूली खर्चो का जुगाड़ करती रही। पारिवारिक समस्या, आर्थिक संकट, भाई बहनों की जिम्मेदारी आदि कार्यो से समय बचाकर खुद के सपने को साकार करना कितना कठीन होता है यह भारती अच्छी तरह बता सकती है।

कहना न होगा कि आज वे मीडिया के फलक पर चमकता सितारा हैं। भारती उच्च शिक्षित ही नहीं बल्कि वह लेखन, वाचन के साथ साथ एक अध्येता भी है। उन्होंने शिल्प कला में भी अपनी दक्षता का प्रमाण दिया तो वहीं शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग स्थापित किए हैं। उन्होंने अलग-अलग विद्यालयों में जाकर शिक्षा की नई परिपाटी को प्रमुखता से बच्चों के साथ प्रयोग किया। शिक्षण कार्य में पुरानी और बूढ़ी हो चुकी व्यवस्था को किनारे करके “लर्निंग बाय डूइंग” जैसी प्रक्रिया को बच्चों के साथ आरंभ किया हैं। आज उनके पढ़ाये बच्चे उच्च पदों पर सुयोग्य सेवक का परिचय दे रहे हैं। भारती ने अपने नए नए प्रयोगों से समाज में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने एक शिक्षिका के तौर पर काम किया तो न्यू मीडिया के लिए भी अलग पहचान बनाई है। फलस्वरूप इसके वे दूरदर्शन की चिरपरिचित एंकर के रूप में जानी जाती है। वे प्रसार भारती के आकाशवाणी केंद्र देहरादून में ख्यातिलब्ध उद्घोषिकाओ में सुमार है।

वे मानती है कि बिना अध्ययन करने से आप नए प्रयोग नहीं कर सकते हैं यही वजह है कि भारती ने अपनी पढ़ाई के साथ साथ अध्ययन को हथियार बनाया व लोक से जुड़ने की कोशिश की है। अब उनका यह शोध ग्रंथ पूर्ण हो चुका है जो लोक नाटक, लोक साहित्य, लोकगीतों पर एक विशेष शोध कार्य है। यह शोध कार्य भारती सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के साथ कर रही है। यह बड़ी बात है कि आज भी उनके पढ़ाये विद्यार्थी अपनी शिक्षिका के साथ राय-मशविरा के बिना नही रह सकते। कारण इसके भारती मौजूदा समय मे स्थापित लेखिका, एंकर, और काउंसलर है। अतएव उनकी कलम समाज के अंतिम व्यक्ति की बात करती है तो उनकी कविताओं में निसंदेह सकारात्मक दृष्टि है। इसीलिए भारती को सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर भी शब्दों का खजाना माना जाता है। अतः उनके शब्द लगातार पढ़ने और पढ़ाने वालों के काम आ रहे हैं।

वह राष्ट्रीय स्वम् सेवक संघ की महिला सेविका समिति से जुड़ी और साथ साथ संगठन के विद्यालय में शिक्षण कार्य जारी रखा। एक लंबे संघर्ष के बाद भारती ने अपनी काबिलियत को प्रस्तुत किया जो महिला सशक्तिकरण के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।

भारती वर्तमान में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा से हिन्दी साहित्य की शोधार्थी है। इससे पूर्व 16 वर्षो तक शिक्षिका के रूप में कार्य किया। पिछले चार वर्षों से आकाशवाणी देहरादून में उद्घोषिका है। वे विभिन्न मंचों से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का संयोजन करती आ रही है। उत्तराखण्ड की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं युगवाणी, धाद, देहरादून डिस्कवर आदि में निरन्तर कहानी/ कविता प्रकाशित। हिमान्तर, साहित्य-वसुधा, तरंगिनी, जनमंच आजकल, साहित्यनाम जैसी राष्ट्रीय आनलाइन प्रत्रिकाओं में कविता/ कहानी प्रकाशित। दूरदर्शन देहरादून में लोकभाषा रंवाल्टी कविगोष्ठी में प्रतिभाग एवं सम्मानित। उत्तरकाशी का प्रतिष्ठित रंवाई लोक महोत्सव नौगांव, उत्तरकाशी में रंवाल्टी कविगोष्ठी में प्रतिभाग एवं सम्मानित। आभासी दुनियां की प्रमुख संस्थाऐ जैसे साहित्य-वसुधा राष्ट्रीय संगठन, अमालेस साहित्य संगठन एवं विभिन्न साहित्य संगठनों द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित।

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