छावला गैंगरेप की पीड़ित के माता पिता से मिले मुख्यमंत्री धामी,सुप्रीम कोर्ट ने गैंग रेप के आरोपियों को नवंबर माह में कर दिया था बरी

 

दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड सदन में छावला केस की पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात कर कहा कि उत्तराखण्ड की बेटी को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू से भी बात की है। मामले से संबंधित वकील चारू खन्ना से भी पूरी जानकारी ली है। पूरा उत्तराखंड उनके साथ है। मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पूर्व उत्तराखण्ड की बेटी के पिताजी से फोन पर बात की थी और कहा था कि वे जल्द ही दिल्ली आकर उनसे मुलाकात करेंगे। आज मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में उत्तराखण्ड सदन में पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात कर कहा कि पीड़िता हमारे उत्तराखंड की बेटी है और उसे न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

क्या है छावला गैंगरेप

साल 2012 में दिल्ली के छावला गैंगरेप के तीनों दोषियों को पूरी सुनवाई के बाद 7 नवंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यू यू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस बेला त्रिवेदी की बेंच ने तीनों दोषियों रवि कुमार, राहुल और विनोद को बरी कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को भी पलट दिया जिसमें इन्हें फांसी की सजा दी गई थी।

पुलिस ने अदालत में कहा था कि एक आरोपित ने युवती के समक्ष दोस्ती का प्रस्ताव रखा था, जब उसने ठुकरा दिया तो बदले की भावना से इस क्रूर वारदात को अंजाम दिया गया। 7 नवंबर को फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि केस में कई खामियां देखने को मिली हैं।
पाया गया कि अभियोजन पक्ष द्वारा परीक्षण किए गए 49 गवाहों में से 10 गवाहों से जिरह ही नहीं की गई। यही नहीं, कई अन्य महत्वपूर्ण गवाहों से बचाव पक्ष के वकील द्वारा पर्याप्त रूप से जिरह नहीं की गई। जस्टिस त्रिवेदी ने कहा हमने पाया कि अपीलकर्ता-आरोपितों को निष्पक्ष सुनवाई के उनके अधिकारों से वंचित किया गया था। इसके चलते उन्हें संदेह के आधार पर बरी किया जाता है।

आरोपियों के बरी होते ही पीड़िता का परिवार जैसे टूट सा गया। न्याय के मंदिर से आए इस फैसले ने जैसे परिवार को निशब्द कर दिया। उस दिन पिता ने कहा-‘ऐसा लग रहा है जैसे हमारे केस में इंसाफ बिक गया और मां को सबसे ज्यादा सदमा लगा है।

साल 2012 में दिल्ली में पौड़ी की बेटी पीड़िता के साथ निर्भया जैसी दरिंदगी की गई थी। दिल्ली में वह छावला इलाके में रहती थी। घटना वाले दिन वह गुड़गांव के साइबर सिटी इलाके से काम के बाद लौट रही थी, तभी घर के पास तीन लोगों ने कार में उसे अगवा किया। लड़की घर नहीं लौटी तो माता-पिता ने गुमशुदगी दर्ज करवाई। तीन दिन बाद लड़की का शव सड़ी-गली हालत में हरियाणा के रेवाड़ी के पास मिला। पुलिस ने तीन लोगों रवि, राहुल और विनोद को गिरफ्तार किया। लड़की ने रवि का शादी का प्रस्ताव खारिज किया था जिसके बाद उसने दोस्तों के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया।जांच में पता चला था कि लड़की से गैंगरेप के बाद उसके शरीर को सिगरेट और गर्म लोहे से दागा गया था। चेहरे और आंखों पर तेजाब डाला गया उसके नाजुक अंग में बीयर की बोतल मिली थी और उसके नाजुक अंगों को जलाया भी गया था।