आम जनमानस का सवाल क्या राज्य विधानसभा में हुई बैकडोर भर्ती की जांच भी करेगी सरकार

 

दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून

बुधवार को देहरादून में “बिल्डिंग न्यू उत्तराखण्ड कॉन्क्लेव” को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वीडीओ भर्ती की जांच एसटीएफ द्वारा की जा रही है उन्होंने कहा कि जांच में आने वाले प्रत्येक आरोपी को सलाखों के पीछे डाला जाएगा साथ ही आगे ऐसी घटना ना हो इसके लिए कारगर नीति बनाई जाएगी।  जांच में बड़े से बड़े व्यक्ति का नाम आने पर भी उसे छोड़ा नहीं जाएगा जिन्होंने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है उन्हें सलाखों के पीछे डालने का काम हमारी सरकार करेगी।

वहीं सचिवालय में अपने कार्यालय कक्ष में आयोग में भर्ती घोटाले के संबंध में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर परीक्षाओं में गड़बड़ी के दोषियों की गिरफ्तारी के साथ उनकी अवैध संपत्ति को जब्त करने और गैंगस्टर व पीएमएलए में कार्यवाही के निर्देश दिए।

इन भर्तियों में हुए घोटालों को देखते हुए और एक के बाद दूसरी भर्ती में हुए घोटालों की खबर जनता तक पहुँच रही है।तो आमजनमानस में चर्चा का विषय है की राज्य विधानसभा में हुई बैकडोर भर्तियों की जांच भी क्या मुख्यमंत्री धामी करेंगे।
इस संबंध में बीते रोज बुधवार को भाकपा माले के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी ने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र प्रेषित किया है।

उत्तराखंड की विधानसभा में हुईनियुक्तियों के संबंध में भी लगातार आशंकाएं प्रकट की जाती रही हैं. राज्य की विधानसभा, उत्तराखंड में विधान बनाने वाला सर्वोच्च सदन है इसलिए वहां काबिल और योग्यता रखने वाले कर्मचारी अधिकारियों का काम करना बेहद जरूरी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चौथी विधानसभा के कार्यकाल के अंतिम चरण तक ही 129 नियुक्तियां की गयी,जिनकी न रिक्तियों की स्पष्टता है, न विज्ञप्ति की और ना ही परीक्षा कब हुई, इसका ही पता है.  और इन 129 नियुक्तियों में अधिकांश को प्रभावशाली लोगों की सिफ़ारिश पर रखा गया. और मीडिया रिपोर्ट्स में अक्सर कहा जाता रहा है की इन मलाईदार पदों पर नियुक्तियां पैसों के बल पर हुई है।

वहां हुई नियुक्तियां कितनी पाक-साफ हैं, यह तो जांच का विषय है, लेकिन इतना स्पष्ट है कि राज्य बनने के बाद अब तक विधानसभा में हुई नियुक्तियों में पारदर्शिता का नितांत अभाव रहा है, जो इन नियुक्तियों के साफ-सुथरे होने पर संदेह को जन्म देता है।

जानकारी के अनुसार विधानसभा में कार्मिकों की संख्या 560 हो गयी है, जो देश के सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य- उत्तर प्रदेश से भी अधिक है. यह हैरत की बात है कि 405 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में कार्मिकों की संख्या 543 है और 70 सदस्यों वाली उत्तराखंड विधानसभा में सदस्यों की संख्या 560 है।

इस संबंध में वर्ष 2016 में भाजपा के तत्कालीन प्रवक्ता और वर्तमान में विधानसभा के माननीय सदस्य मुन्ना सिंह चौहान ने तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल पर भर्तियों में घपले का आरोप लगाया और कहा था कि जो अधिकांश लोग नियुक्त हुए वे कुंजवाल के विधानसभा क्षेत्र- जागेश्वर के थे।

अब देखने वाली बात यह होगी की उत्तराखंड की सरकार जो कि सरकारी नियुक्तियों पर हुए भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई व पारदर्शिता की बात कर रही है वह पूर्व में विधानसभा सहित अन्य संस्थानों में विभिन्न पदों में हुई नियुक्तियों पर उठे भ्रष्टाचार के सवालों को माकूल जवाब देने हेतु उनको भी जांच के दायरे पर ले सूबे की जनता को सरकारी नियुक्तियों पर पूर्व में हुए भ्रष्टाचार पर कार्यवाही का का संदेश दे पाती है या नही।