महिलाओं की नेतृत्व क्षमता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करने वाले दल  धरातल की सच्चाई से अनभिज्ञ : कुसुम कंडवाल

दी टॉप टेन न्यूज़ /देहरादून

देहरादून: उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने 16 से 18 अप्रैल 2026 के मध्य आयोजित संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से संबंधित महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों को पारित न होने देने की कड़े शब्दों में निंदा की है।

उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जब केंद्र सरकार महिलाओं को नीति-निर्धारण के सर्वोच्च स्तर पर लाने के लिए संकल्पित है, तब कुछ दलों का यह नकारात्मक रुख करोड़ों भारतीय महिलाओं के भविष्य के साथ विश्वासघात है। आयोग का मानना है कि यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं है, बल्कि उस संवैधानिक न्याय को रोकने का प्रयास है, जिसका अधिकार भारत की नारी शक्ति को दशकों पहले मिल जाना चाहिए था।

​अध्यक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं की नेतृत्व क्षमता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करने वाले दल शायद धरातल की सच्चाई से अनभिज्ञ हैं। उत्तराखंड, जहाँ पंचायत राज संस्थाओं में 50% महिला आरक्षण ने समाज की दिशा बदल दी है, वहाँ की मातृशक्ति आज शासन और प्रशासन को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। जब ये मातृशक्ति प्रदेश की महिलाएं विषम परिस्थितियों में भी विकास के मानक स्थापित कर सकती हैं, तो संसद में उनके सामर्थ्य पर संदेह करना न केवल तर्कहीन है बल्कि वैचारिक संकीर्णता की पराकाष्ठा है।

जो लोग आज तकनीकी बाधाओं का बहाना बना रहे हैं, उनका एकमात्र उद्देश्य महिलाओं को नेतृत्व से वंचित रखना है।

​कुसुम कंडवाल ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि राज्य महिला आयोग उन सभी शक्तियों का पुरजोर विरोध करेगा जो महिलाओं के व्यापक हितों और उनके राजनीतिक अधिकारों के मार्ग में दीवार बनेंगी।

उन्होंने चेतावनी दी कि देवभूमि की मातृशक्ति अब जागरूक है और वह इस अपमान को राष्ट्र की हर बेटी के सम्मान से जुड़ा विषय मानती है। जो दल महिला सशक्तिकरण को केवल नारों तक सीमित रखते हैं और सदन में अधिकार देने के समय पीछे हट जाते हैं, उन्हें आने वाले समय में देश की संगठित नारी शक्ति को जवाब देना होगा।

आयोग महिलाओं के संवैधानिक हक की इस लड़ाई में अंतिम क्षण तक मातृशक्ति के साथ तक उनके साथ खड़ा है।

आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि राज्य महिला आयोग उन सभी शक्तियों का पुरजोर विरोध करेगा जो महिलाओं के व्यापक हितों और उनके राजनीतिक अधिकारों के मार्ग में दीवार बनेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि देवभूमि की मातृशक्ति अब जागरूक है और वह इस अपमान को राष्ट्र की हर बेटी के सम्मान से जुड़ा विषय मानती है। जो दल महिला सशक्तिकरण को केवल नारों तक सीमित रखते हैं और सदन में अधिकार देने के समय पीछे हट जाते हैं, उन्हें आने वाले समय में देश की संगठित नारी शक्ति को जवाब देना होगा।