सुरेश कांडपाल
देहरादून- पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद का आज निधन हो गया। स्वामी सानंद 22 जून से कनखल के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में गंगा की अवीरलता और गंगा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे थे। प्रोफेसर जीडी अग्रवाल आईआईटीयन थे। आईआईटी में प्रोफेसर रह चुके जीडी अग्रवाल इंडियन सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में सदस्य भी रह चुके थे।
स्वामी के मंगलवार 9 अक्टूबर को जल त्यागने की चेतावनी देने पर हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के साथ हुई वार्ता भी विफल रही। स्वामी सानंद ने सांसद द्वारा लाई गई अधिसूचना की प्रति को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह कोई ठोस कदम नहीं है केंद्र सरकार ने स्वामी की बातों को मनवाने के लिए एक अलग आयोग बनाने की बात की थी।
बुधवार को स्वामी के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें ऋषिकेश एम्स में भर्ती करा दिया था लेकिन स्वामी ने एम्स में भी अपना आमरण अनशन जारी रखा। इस तरह 112 दिन के अनशन के बाद स्वामी सानंद का निधन हो गया। हालांकि कुछ वर्षों पहले जब स्वामी सानंद उत्तरकाशी में बांध के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे थे तो केंद्र सरकार को कई निर्माणाधीन परियोजनाएं बंद करनी पड़ी थी। पर इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ।
जीते जी मां गंगा के लिए संघर्ष करने वाले स्वामी मौत के पश्चात अपना शरीर भी दान कर गए हैं। उनकी इच्छा को देखते हुए एम्स प्रशासन इसकी तैयारी में जुट गया था।फिलहाल कलयुग का भागीरथ माँ गंगा की अविरलता के अपने 111 दिनों के अनशन उपरांत शहीद हो गया।
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