साइबर स्टॉकिंग गंभीर अपराध, बिना डरे 1930 पर करें शिकायत, निजता से न करें समझौता : राज्य महिला आयोग

दी टॉप टेन न्यूज़

एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में स्टॉकिंग एवं साइबर स्टॉकिंग की रोकथाम को लेकर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला संपन्न

​पौड़ी/श्रीनगर : 23 सितंबर, 2026
​उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से बुधवार को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (श्रीनगर) के सभागार में स्टॉकिंग एवं साइबर स्टॉकिंग की रोकथाम संबंधी एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने प्रतिभाग किया। इस दौरान स्टॉकिंग एवं साइबर स्टॉकिंग से जुड़े अपराधों, उनके दुष्प्रभावों, कानूनी प्रावधानों, बचाव के उपायों, मानसिक स्वास्थ्य तथा सहायता तंत्र के संबंध में विस्तार से जागरूक किया गया।

​कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि समय के साथ अपराधों के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है। पहले स्टॉकिंग मुख्य रूप से सड़कों और सार्वजनिक स्थलों तक सीमित थी और बदनामी का दायरा भी मोहल्ले तक रहता था, लेकिन वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया के माध्यम से साइबर स्टॉकिंग जैसी गंभीर चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं न केवल घर संभाल रही हैं बल्कि खेती, पशुपालन, सरकारी एवं निजी सेवाओं के साथ-साथ राष्ट्र रक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। अध्यक्ष ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के कल्याण, सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 में कार्यभार संभालने के बाद से आयोग का निरंतर संकल्प रहा है कि किसी भी पीड़ित महिला को न्याय के लिए भटकना न पड़े। फोन, व्हाट्सएप अथवा ईमेल के जरिए दिन-रात प्राप्त होने वाली हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाती है और दूरदराज के क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन से सीधा समन्वय स्थापित कर उनके गृह क्षेत्र में ही कराया जा रहा है।

गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि आज समाज में आपसी रिश्तों को संजोने और पारिवारिक संवाद में निरंतरता बनाए रखने की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी का स्मरण कराते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को मातृशक्ति के रूप में पूजनीय माना गया है और उनकी सुरक्षा समाज के प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। वहीं विशिष्ट अतिथि एवं महापौर आरती भंडारी ने कहा कि तकनीक जितनी सुविधाजनक है, असावधानी बरतने पर उतनी ही नुकसानदेह भी साबित हो सकती है।

​तकनीकी एवं कानूनी सत्र में विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञ पुलिस उप निरीक्षक सुषमा उनियाल ने बताया कि बिना सहमति के किसी का पीछा करना स्टॉकिंग के दायरे में आता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत इसमें पहली बार अपराध करने पर 3 साल और दोबारा करने पर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अजनबियों को फॉलो करने से बचने की हिदायत दी और किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा एनसीआरबी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने को कहा। मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ डॉ श्वेता कृष्णा ने कहा कि किसी अजनबी द्वारा लगातार निगरानी रखना व्यक्ति को मानसिक अवसाद की ओर धकेलता है, इसलिए सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में उलझने के बजाय युवाओं की नियमित काउंसलिंग जरूरी है। इसके साथ ही अधिवक्ता लक्ष्मी एवं साइबर सेल श्रीनगर के प्रभारी निरीक्षक विनय कुमार ने बताया कि साइबर अपराधी भौगोलिक सीमाओं से परे बैठकर अपराध करते हैं, इसलिए सोशल मीडिया अकाउंट को हमेशा प्राइवेट रखें, अवांछित लिंक या एपीके (APK) फाइलों को कभी डाउनलोड न करें, बिल भुगतान सिर्फ अधिकृत वेबसाइटों से करें और अपनी लोकेशन सार्वजनिक करने से बचें।

 

​कार्यक्रम का संचालन डॉ.अनु राही द्वारा किया गया। इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चंद्रकला तिवारी, आयोग की सदस्य दर्शनी पवार, विजया रावत, बत्सला सती, कुलसचिव प्रो. वाई.पी. रेवानी, प्रो. मंजू गुसाईं, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष प्रमिला भंडारी, आशा पैन्यूली, सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, स्थानीय महिलाएं, आयोग के कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।