डीडीहाट में ‘शैक्षिक दखल समिति’ का 14वाँ वार्षिक अधिवेशन सम्पन्न

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सार्वजनिक शिक्षा, स्त्री विमर्श और पठन-संस्कृति पर केन्द्रित रही परिचर्चाएँ

 

डीडीहाट : जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), डीडीहाट, पिथौरागढ़ में ‘शैक्षिक दखल समिति’ का 14वाँ दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन दिनांक 21 से 22 जून, 2026 तक शिक्षकों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और प्रशिक्षु अध्यापकों की सक्रिय सहभागिता के साथ सम्पन्न हुआ। अधिवेशन में सार्वजनिक शिक्षा, स्त्री शिक्षा, बाल साहित्य तथा पठन-लेखन की संस्कृति से जुड़े समकालीन मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
अधिवेशन के उद्घाटन अवसर पर ‘शिक्षा तथा स्त्री’ विषय पर केन्द्रित शैक्षिक दखल पत्रिका के नवीन अंक का विमोचन मुख्य अतिथि दुष्यंत सिंह पांगती, डायट प्राचार्य भास्करानंद पाण्डे, राजकीय इंटर कॉलेज डीडीहाट के प्रधानाचार्य प्रेम सिंह पापड़ा तथा अन्य अतिथियों की उपस्थिति में किया गया।
डायट प्राचार्य भास्करानंद पाण्डे ने कहा कि डिजिटल युग में स्वतंत्र चिंतन और पढ़ने-लिखने की संस्कृति अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे समय में शैक्षिक पत्रिकाओं का प्रकाशन और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। मुख्य अतिथि दुष्यंत सिंह पांगती ने कक्षा-कक्ष में संवाद और पठन-संस्कृति को लोकतांत्रिक एवं संवेदनशील समाज के निर्माण की आधारशिला बताया।


शैक्षिक दखल के संपादक दिनेश कर्नाटक ने कहा कि पिछले चौदह वर्षों से पत्रिका शिक्षा के सरोकारों पर बहस को आगे बढ़ाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘शिक्षा तथा स्त्री’ विषयक यह अंक स्त्री शिक्षा और अस्मिता से जुड़े विविध प्रश्नों को केंद्र में लाता है।
बाल साहित्यकार मनोहर चमोली ‘मनु’ ने पत्रिका की समीक्षा करते हुए बताया कि इस अंक में पचास से अधिक रचनाकारों के लेख, कविताएँ और कहानियाँ शामिल हैं, जो स्त्री शिक्षा के विभिन्न आयामों को समृद्ध दृष्टि प्रदान करती हैं। नवाचारी शिक्षिका राजेन्द्री कन्याल और वक्ता प्रियंका ने भी स्त्री शिक्षा एवं स्त्री अस्मिता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार रखे।
प्रथम सत्र का संचालन शैक्षिक दखल समिति के सचिव राजीव जोशी ने किया। कला संपादक टिहरी के शिक्षक मोहन चौहान ने शिक्षा को स्थानीय परिवेश और लोक संस्कृति से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि सतीश जोशी ने कक्षा और समाज के बीच जीवंत संबंध स्थापित करने की वकालत की।
द्वितीय सत्र का संचालन रमेश जोशी द्वारा किया गया जिसमें शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर आयोजित गोष्ठी में मनोहर चमोली, सतीश जोशी, निर्मल न्योलिया, विनोद बसेड़ा सहित अनेक शिक्षकों और शिक्षाविदों ने सहभागिता की। गोष्ठी में डायट के प्रशिक्षु शिक्षकों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया।
अधिवेशन के दूसरे दिन बाल साहित्य पर आयोजित सेमिनार में मनोहर चमोली ‘मनु’ ने कहानी के माध्यम से शिक्षण की बारीकियों पर प्रस्तुतीकरण दिया। समापन सत्र में संपादक महेश पुनेठा ने गोष्ठी में उभरे प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दिए। अध्यक्ष महेश बवाड़ी ने संपूर्ण कार्यक्रम की समीक्षा के साथ शैक्षिक दखल पत्रिका के अब तक प्रकाशित सभी अंकों का एक संपूर्ण सेट डायट प्राचार्य को पुस्तकालय हेतु भेंट किया गया। इस अवसर पर शिक्षा से जुड़े विषयों पर पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।

निर्मल न्योलिया की रिपोर्ट