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दिल्ली की गीतांजलि श्री को “टॉम्ब ऑफ सैंड'” के लिए प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2022 से सम्मानित किया गया

 

दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून

यूपी के मैनपुरी में जन्मी और वर्तमान में नई दिल्ली में रहने वाली लेखिका गीतांजलि श्री का अनुवादित हिंदी उपन्यास, ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’, प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2022 से सम्मानित होने वाली भारतीय भाषा में लिखी जाने वाली पहली पुस्तक बन गई है।
राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित ‘रेत समाधि’ हिंदी की पहली ऐसी किताब है जिसने न केवल अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की लॉन्गलिस्ट और शॉर्टलिस्ट में जगह बनायी बल्कि गुरुवार की रात, लंदन में हुए समारोह में ये सम्मान अपने नाम भी किया।
मूल रूप से हिंदी में रेत समाधि के रूप में प्रकाशित, पुस्तक का अंग्रेजी में अनुवाद डेजी रॉकवेल द्वारा किया गया है. और वह इनामी राशि डेजी रॉकवेल के साथ सांझा करेंगी।

गीतांजलि श्री ने कहां मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कर सकती हूं. श्री ने कहा मैंने कभी बुकर का सपना नहीं देखा था कितनी बड़ी बात है मैं चकित भी हूं और खुद क सम्मानित भी महसूस कर रही हूं और विनम्र भी उन्होंने कहा इस पुरस्कार के मिलने से एक अलग तरह की संतुष्टि मुझे हो रही है।

‘रेत समाधि/रेत का मकबरा’ उस दुनिया के लिए एक शोकगीत है जिसमें हम निवास करते हैं. एक स्थायी ऊर्जा जो आसन्न कयामत के सामने आशा बनाए रखती है. बुकर पुरस्कार मिलने के बाद निश्चित रूप से किताब कई और लोगों तक पहुंचेगी. ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ 13 लंबे सूचीबद्ध उपन्यासों में से एक था, जिसका 11 भाषाओं से अंग्रेजी में अनुवाद किया गया था।

पुरस्कार विजेता पुस्तक एक 80 वर्षीय महिला की कहानी बताती है जो अपने पति की मृत्यु के बाद गहरे अवसाद में चली जाती है. आखिरकार, वह अपने अवसाद पर काबू पाती है और विभाजन के दौरान अपने पीछे छोड़े गए अतीत का सामना करने के लिए पाकिस्तान जाने का फैसला करती है. जब बुकर पुरस्कार के लिए नामित पुस्तकों की सूची जारी हुई थी तब जजों ने इस हिंदी उपन्यास के बारे में कहा था कि गीतांजलि श्री की आविष्कारशील, ऊर्जावान रेत समाधि लगातार बदलते दृष्टिकोण और समय-सीमा में एक 80 वर्षीय महिला के जीवन और आश्चर्यजनक अतीत की ओर ले जाती है. डेज़ी रॉकवेल का उत्साही अनुवाद पाठ को और आसान बनाता है. यह एक जोरदार और अनूठा उपन्यास है।

गीतांजलि ने तीन उपन्यास और लघु कथाओं के कई संग्रह लिखे हैं, जिनमें से कई का अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, सर्बियाई और कोरियाई भाषा में अनुवाद किया जा चुका है. पुरस्कार के लिए नामित होने के बाद श्री ने कहा था कि लिखना अपने आप में पुरस्कार है लेकिन बुकर की तरह विशेष पहचान प्राप्त करना एक अद्भुत बोनस है. तथ्य यह है कि आज दुनिया भर में बहुत कुछ निराशाजनक है, पुरस्कार साहित्य जैसे क्षेत्र में सकारात्मक मूल्य में वृद्धि करते हैं।

गीतांजलि श्री उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से ताल्लुक रखती हैं. श्री तीन उपन्यास और कई कथा संग्रह की लेखिका हैं. उनकी कृतियों का अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, सर्बियन और कोरियन भाषाओं में अनुवाद हुआ है. दिल्ली में रहने वाली 64 वर्षीय लेखिका श्री की अनुवादक डेजी रॉकवेल एक पेंटर एवं लेखिका हैं जो अमेरिका में रहती हैं. उन्होंने हिंदी और उर्दू की कई साहित्यिक कृतियों का अनुवाद किया है.

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