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आने वाले समय मे माता पिता और बुजुर्ग नाती पोतों और दामाद से मांग सकेंगे गुजारा भत्ता

 

दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून

समय के बदलने के साथ साथ समाज मे सामाजिक ताने बनो में भी बदलाव महसूस किया जा सकता है वर्तमान समय मे जब रिश्ते कमजोर पड़ रहे है और परिवार अपनी जिम्मेदारियों से दूर भागने की कोशिश कर रहे है तब ऐसे समय मे भारत सरकार का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय आगे आ रहा है।

इस बार संसद के शीतकालीन सत्र में माता पिता और बुजुर्गों के भरण पोषण से जुड़े विधेयक में बदलाव होने की उम्मीद है क्योंकि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय करीब तीन साल के लंबे इंतजार के बाद माता-पिता व बुजुर्गों के भरण पोषण से जुड़े विधेयक में बदलाव को लेकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।

इससे पूर्व इस विधेयक को पहली बार वर्ष 2019 में संसद में पेश किया गया था, लेकिन बाद में इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक कमेटी के सुझाव के बाद इस विधेयक में कई अहम बदलाव किए गए है। जिसमें बुजुर्गों को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। कोई इनकी सेवा नहीं करता है तो फिर सरकार उनकी देखभाल करेगी। इसके लिए देश में एक ढांचा खड़ा किया जाएगा। जिसमें प्रत्येक जिलों में बुजुर्गों की मौजूदगी को मैपिंग करते हुए मेडिकल सुविधा युक्त वृद्धाश्रमों और जिला स्तर पर एक सेल गठित होगी। जो इससे जुड़ी सुविधाओं को संचालित करेगी।

प्रस्तावित विधेयक में इसके अलावा घरों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। इसके तहत प्रत्येक थाने में बुजुर्गों से जुड़े मामलों को देखने और उनका पूरा ब्यौरा रखने के लिए एक सब इंस्पेक्टर या फिर उसके समकक्ष रैंक का कोई पुलिस अधिकारी नामित होगा। जो थाना क्षेत्र में रहने वाले ऐसे प्रत्येक बुजुर्ग की एक सूची रखेगा। साथ ही उनकी देखरेख करने वाले लोगों और पड़ोसियों का भी ब्यौरा रखेगा। गौरतलब है कि माता-पिता और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़ा मौजूदा कानून वर्ष 2007 में बना था।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार माता-पिता अब सिर्फ अपने जैविक बच्चों से ही गुजारा भत्ता लेने के हकदार नहीं होंगे, बल्कि अब वह नाती-पोते, दामाद या फिर ऐसे संबंधी जो उनकी संपत्ति के दावेदार होंगे, उन सभी संबंधियों से वह गुजारा भत्ता मांग सकेगा। 

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