देहरादून- उत्तराखण्ड राज्य के जिन विषयो पर केंद्र सरकार से त्रिवेंद्र सरकार को प्रयास कर लाभ लेना चाहिए उन पर राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी दो कदम आगे चल रहे है। ताज़े मामले में युवा सांसद अनिल बलूनी ने देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से उत्तराखण्ड की स्वास्थ्य समस्याओं के निदान व पलायन की पीड़ा से निपटने के लिए केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
युवा सांसद बलूनी ने जंहा उत्तराखण्ड की लम्बे समय से विकराल होती जा रही स्वास्थ्य समस्याओं की और ध्यान आकर्षित किया है। वही पहाड़ के पलायन के पीछे देवभूमि के पर्वतीय अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य सविधाओं के अभाव को मुख्य कारण माना है। बलूनी जी ने अपने पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तराखण्ड के निवासी अवैतनिक प्रहरी के तौर पर देश की सीमाओं पर निवास कर रहे है। लेकिन पर्याप्त मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पलायन से उत्तराखण्ड के गांव लगातार खाली होते जा रहे है। वर्तमान में रिपोर्ट के अनुसार 2.85 लाख घरों में ताले लटके पड़े है।यही नही 998 गांव भूतहा(घोस्ट विलेज) घोसित हो चुके है।वही देवभूमि में पलायन के दंश से लगभग 35 सौ गांव खाली हो चुके है। इन सबकी मुख्य वजह कही ना कही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में पर्वतीय अंचलों के नागरिक महानगरों की और पलायन कर रहे है। जिसके चलते उत्तराखण्ड के सीमान्त पहाड़ निर्जन होते जा रहे है।
सांसद अनिल बलूनी ने इन सभी विषयों पर प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान आकर्षित कर बताया कि ऋषिकेश के एम्स व हल्द्वानी के सुशीला तिवारी दोनों कुमाऊं के तराई इलाको में स्थापित है। इसलिए कुमाऊं व गढ़वाल दोनों स्थानों पर मेडिकल पीजीआई की स्थापना की जाए ताकि पहाड़ के पर्वतीय अंचलों में निवास कर रही जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सविधाओं का लाभ मिल सके। बलूनी ने गढ़वाल के श्रीनगर मेडिकल कॉलेज व अल्मोड़ा के प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को मेडिकल पीजीआई के रूप में विकसित करने का प्रधानमंत्री से निवेदन किया है। ताकि पहाड़ की स्वास्थ्य समस्याओं का निदान हो सके साथ ही पलायन की समस्या पर भी अंकुश लगाया जा सके।
बहरहाल जिस तरह राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी उत्तराखण्ड की जन समस्याओं को राज्य सरकार से पहले केंद्र सरकार तक पहुँचा उन्हें केंद्र सरकार के माध्यम से हल करवाने का प्रयास कर रहे है। युवा सांसद के उत्तराखण्ड के लिए इस चिंता व प्रयासों की देवभूमि की जनता भी सराहना कर रही है। अपने राज्य सभा सांसद के इस अल्प समय मे जिस तरह युवा सांसद बलूनी ने राज्य की समस्याओं को केंद्र सरकार के पटल पर उठा उन्हें हल करवाने का प्रयास किया है वह निश्चित ही उन्हें उत्तराखण्ड के लिए चिंतनशील जननेता के रूप में स्थापित कर रहा है। देवभूमि के हितार्थ जिन विषयो पर उत्तराखण्ड की त्रिवेंद्र सरकार ने सोचना भी शुरू नही किया है उन पर सांसद अनिल बलूनी ने दूरदृष्टि दिखाते हुए उन्हें धरातल पर उतारना भी शुरू कर दिया है।इसलिए वर्तमान में अनिल बलूनी की उत्तराखण्ड की जनसमस्याओं के निदान को लेकर की जा रही कवायत पर यह कहना बिलकुल भी गलत नही होगा कि उत्तराखण्ड सरकार के काम सांसद अनिल बलूनी दे रहे है अंजाम।


नीता कांडपाल