दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून
अल्मोड़ा : आज के दिन 4 जनवरीको प्रति वर्ष ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुईस ब्रेल का जन्मदिन मनाया जाता है, जिनका जन्म फ्रांस में 1809 में हुआ था। लुईस ब्रेल की याद में शिक्षा, संचार और सामाजिक समावेशन में ब्रेल के महत्व के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने हर वर्ष 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की ।
इसी क्रम में राष्ट्रीय दृष्टि हीन संघ (शाखा अल्मोड़ा) द्वारा आज रैमजे इंटर कॉलेज अल्मोड़ा में ब्रेल लिपि के अविष्कारक विश्व ख्याति प्राप्त लुईस ब्रेल की जयंती मनाई गई, इस अवसर पर भाषण और निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। जयंती में अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़से भी दृष्टि बाधित शामिल हुए। इस अवसर पर जन्म से कई दृष्टि बाधितों ने संगीत, और लोककला, पारंपरिक वाद्यों की प्रस्तुति दी। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से संघ द्वारा दृष्टिबाघितो को छड़ी भी वितरित की गई। इस अवसर पर कई वक्ताओं ने लुईस ब्रेल के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला वहीं जयंती समारोह में अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ अल्मोड़ा इकाई के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राणा ने कहा कि वह दिव्यांगो के हित के लिए जितना हो सके कार्य करते हैं, दिव्यांगों को प्रशिक्षण, कौशल विकास प्रशिक्षण, शूरू करवाये ताकि वह अपना रोज़गार कर सकें, जो बच्चे दृष्टि बाधित हैं उनको मुफ़्त शिक्षा दिलाने का भी प्रयास करेगें।
उन्होंने कहा कि लुईस ब्रेल की ब्रेल लिपि आज भी प्रासंगिक है क्योंकि ब्रेल भाषा नहीं लिपी है प्रारंभिक शिक्षा इसी से प्रारम्भ होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कंप्यूटर में कई डिवाइस आ गईं हैं, जब हमें अक्षर ज्ञान होगा तभी डिवाइस चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि लुईस ब्रेल के बताए हुए रास्ते पर चल कर दृष्टिबाधितों का उत्थान हो सकता है।
बागेश्वर जनपद के रैखोली गांव से आए जन्मदृष्टि बाधित दिवान सिंह रावत ने कहा कि वह जन्मांध हैं, वह पारंपरिक हुड़का वादन करते हैं, साथ ही सभी पारंपरिक लोक विधाओं को जानते हैं, हुड़का वादन से ही उनके परिवार का भरण पोषण होता है उन्हें समाज कल्याण विभाग से केवल दिव्यांग पेंशन ₹1500 मिलती है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगो के अंदर छिपी पारंपरिक लोक विधा को आगे लाने के प्रयास होने चाहिए।
वहीं दृष्टिबाधित नेहा आगरी ने कहा कि मैं बचपन से ही दृष्टि बाधित हू, उनके माता पिता उन्हें पढ़ा रहे हैं उनका हौसला बढ़ा रहे हैं उन्होंने कहा कि जितने भी दृष्टि बाधित हैं उनके परिजनों को उनका हौसला बढ़ाना चाहिए।



