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भक्तों की आस्था का केंद्र :मां डाट काली मंदिर

माँ के दरबार में नवरात्रि में लग रहा है भक्तो का ताँता

नीता कांडपाल

दी टॉप टेन न्यूज- (देहरादून) देवभूमि उत्तराखंड यूं तो देवताओं की भूमि के नाम से प्रसिद्ध है इस देवभूमि में कई प्राचीन और धार्मिक मान्यताओं के मंदिर स्थित है इन्हीं में से देहरादून के प्रसिद्ध मंदिरों में एक मां डाट काली का मंदिर जो की मनोकामना सिद्ध पीठ और काली मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
देहरादून शहर से 14 किलोमीटर दूर सहारनपुर देहरादून हाईवे पर स्थित मां डाट काली मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह मां के सिद्ध पीठों में से एक है। इस समय नवरात्र में मां के मंदिर में देहरादून सहित आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु बड़ी मात्रा में दर्शन करने पहुंच रहे हैं और पूजा अर्चना कर मन्नत मांग रहे हैं। काली मंदिर का निर्माण जून  1804 में किया गया था कहा जाता है कि अंग्रेज उस समय में सहारनपुर देहरादून मार्ग पर एक सुरंग का निर्माण करवा रहे थे जो पूरा नहीं हो पा रहा था फिर अंग्रेजों ने मां के दरबार में मत्था टेका तो सुरंग का कार्य पूर्ण हुआ। गोरखा सेनापति बलभद्र थापा ने यहीं पर भद्रकाली मंदिर की स्थापना की थी इसलिए डाट काली मंदिर के निकट एक प्राचीन भद्रकाली मंदिर भी स्थित हैं। भक्तों में मान्यता प्रचलित है कि मंदिर में एक दिव्य ज्योति जल रही है जो कि सन 1921 से लगातार प्रज्वलित है। देहरादून आसपास के क्षेत्रों में यदि कोई भक्त माता रानी का जागरण करवाता है तो वह जोत माँ डाट काली मंदिर से लेकर आता है देहरादून वासी जब भी कोई नया वाहन खरीदते हैं तो वह वाहन की पहली पूजा डाट काली मंदिर में ही करवाते है । नवरात्रि पर्व पर तो भक्तों का ताँता लगा ही रहता है उत्तराखंड से ही नहीं अपितु उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में इस सिद्ध पीठ में दर्शनार्थ आते हैं।\


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