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उत्तराखण्ड की इंडो नेपाल सीमा पर दम तोड़ती मानवीय संवेदनाये

नेपाली मजदूरों का हो रहा पैसा जप्त, लेकिन नेपाल कैसिनो रोजाना बेरोकटोक जा रही लाखों की भारतीय करेंसी

दीपक फुलेरा-

दी टॉप टैन न्यूज़(चम्पावत)- भले ही नेपाल भारत का मित्र राष्ट्र हो, दोनों देश के मध्य आवागमन में भी खुली छूट हो। लेकिन बात अगर भारत नेपाल के मध्य पड़ने वाले बोडर्स कि की जाए तो पिछले कुछ समय से इन सीमाओं पर मानवीय संवेदनाये लगातार दम तोड़ रही है।भारत से मजदूरी कर नेपाल अपने देश जाने वाले नेपाली मजदूरों से सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा एजेंसियां उनसे मिल रही भारतीय करेंसी को जप्त कर रही है।इसके बावजूद रोजाना बनबसा सीमा से  नेपाल के महेन्द्रनगर कैसिनो लाखों रुपये की भारतीय करेंसी ले जाने वाले जुआरियों पर सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों की दया दृष्टि बनी हुई है।
सर्व विदित है कि नेपाल से सेकड़ो मजदूर रोजी रोटी की तलाश में भारत के विभिन्न शहरों में रोजाना बनबसा सीमा से रवाना होते है। वही नेपाली मजदूरी की वापसी भी इस सीमा से अपने देश को होती है। इस दौरान भारत मे सड़क निर्माण,मजदूरी,सामान ढोने सहित विभिन्न कार्य नेपाल के दुरस्त अंचल के मजदूर करते है। मजदूरी का पैसा कमा कर 6 माह 8 माह या साल भर में इन नेपाली मजदूरी की वापसी अपने देश को होती है। स्वभाविक तौर पर इस दौरान इन मजदूरों के पास एक से दो लाख मजदूरी से कमाया हुआ पैसा होता है। वही कई मजदूर अपने साथियों के माध्यम से जो घर नही आ पाते पैसा भेजते है। ऐसी स्थिति में कई मजदूरों के पास ज्यादा पैसा भी होता है जिसे  वो बनबसा टनकपुर सीमाओं से होकर अपने घर नेपाल ले जाता है।
लेकिन इन नेपाली मजदूरों के पास से इंडो नेपाल सीमा पर तैनात पुलिस ,एसएसबी व कस्टम चेकिंग के दौरान लगातार लाखों की भारतीय करेंसी पकड़ रही है। जो कि ये नेपाली मजदूर भारत मे महीनों मजदूरी कर कमा अपने घर ले जा रहे होते है। जब पैसा पकड़ने वाली एजेंसियों द्वारा इन पैसों का इनकम ऑफ सोर्स के सबूत मांगे जाते है तो नेपाल के दुरस्त अंचलों के मजदूर इन एजेंसियों को कोई सबूत नही दे पाते। क्योंकि व्यवहारिक रूप में उन्होंने इस पैसों को कई महीनों की मजदूरी के दौरान इकट्ठा किया होता है। लगातार कुछ महीनों से उत्तराखण्ड की बनबसा टनकपुर सीमाओं पर ऐसे ही नेपाली मजदूरों से पकड़ी गई भारतीय करेंसी को नेपाली मजदूर भारी मन व नम आँखों से छोड़ कर अपने देश लौट जाते है। लेकिन इस दौरान सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियां मित्र राष्ट्र के इन नागरिकों के प्रति मानवीय पक्ष नही दर्शाती है। जबकि उनको भी अक्सर अपनी प्रारंभिक जांच में पता चल जाता की जो पैसा उन्होंने सीमा पर नेपाली नागरिक से पकड़ा है वो उसने मजदूरी कर कमाया है। लेकिन इंडो नेपाल सीमा पर गुड वर्क दिखाने के इस खेल में मानवीय संवेदनाये भारत नेपाल सीमा पर अक्सर तार तार होती है। 
इन नेपाली मजदूरों पर जंहा फेमा एक्ट यानी पच्चीस हजार से अधिक भारतीय करेंसी को भारत से नेपाल ना ले जा पाने वाले कानून का चाबुक पड़ता है। वही इसके उलट बनबसा बॉर्डर से रोजना नेपाल के महेन्द्रनगर,धनगढ़ी  केसिनो में जुआ खेलने को जाने वाले भारतीय जुवारी लाखो रुपये की भारतीय करेंसी का परिवहन रोजना इसी बॉर्डर से करते है। लेकिन आज तक इंडो- नेपाल सीमा पर तैनात चाहे पुलिस, एसएसबी, या कस्टम विभाग किसी एजेंसी ने भी पकड़ने की जहमत नही उठाई है।सूत्रों के अनुसार नेपाल में स्थित कैसिनो मालिको द्वारा सीमा पर तैनात एजेंसियों को उनके ग्राहकों को बेरोकटोक जाने देने के लिए मैनेज भी किया जाता है। लेकिन नेपाली मजदूरों से उनकी मेहनत की कमाई का पैसा बॉर्डर पर जप्त कर मित्र राष्ट्र के नागरिकों के प्रति ये कैसी मानवीय संवेदना व्यक्त की जा रही है। 
हालांकि भारत मे वारदात कर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा चोरी या डकैती के लाखों रुपये के जेवरात बॉर्डर पर नेपाली नागरिकों से बरामत किये गए है।लेकिन कुछ चुनिंदा खराब लोगो के चलते हर नागरिक के साथ एक जैसा व्यवहार नही किया जा सकता। इसलिए देश की सुरक्षा के मद्देनजर चेकिंग आवश्यक तो है लेकिन अगर इस दौरान नेपाली मजदूरों से पैसा पकड़ा जाता है तो उसे पूछताछ के आधार पर चेक किया जा सकता है कि यह किसी गलत तरीके से तो नही लाया जा रहा है। लेकिन अगर जांच में यह पता चल जाता है कि यह पैसा मजदूरी से कमाया हुआ है सम्बंधित मजदूर इसका कोई सबूत नही दे पा रहा है। तो मानवीय पहलुओं को अपनाते हुए अपने उच्च अधिकारियों को विश्वास में ले इनके पैसे को रिलीज किया जाना चाहिए। क्योंकि इस तरह के लगातार मामलों से जंहा मित्र राष्ट्र के साथ हमारे मित्रवर सम्बन्धो पर फर्क पड़ता है। वही इसका असर नेपाल में भारतीय नागरिकों के साथ भी देखा जा सकता है। 
अक्सर मित्र राष्ट्रों के मध्य सीमाओं पर मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए कई नियम कानूनों को स्थिल करने के लाखों उदाहरण मिल सकते है। इस लिए इस तरह के मामलों में सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मानवीय पक्ष दिखाना भी जरूरी है। भारतीय प्रशासन को चाहिए कि इस तरह भी अपना ध्यान आकर्षित करें व नेपाल के मजदूरों को आ रही इस तरह की परेशानियों पर कानून के साथ साथ मानवीय संवेदनाओं को इंडो नेपाल सीमाओं पर ना मरने दे।क्योंकि इस समय जल्द दशहरे का त्योहार आने वाला है। जो कि नेपाल राष्ट्र में सबसे बड़े त्योहार के रूप में जाना जाता है। इस समय हर नेपाली नागरिक कई महीनों बाद रुपये कमा कर हर्षोउल्लास के साथ दसई का त्योहार मनाने अपने देश लौटता है। इस समय अगर इंडो नेपाल सीमा पर फेमा एक्ट की चाबुक इन गरीब नेपाली मजदूरों पर पड़ेगी तो निश्चित ही मानवता भी शर्मशार होगी। इसलिए मित्र राष्ट्र नेपाल से भारत के पुरातन व रोजी रोटी व बेटी के सम्बंध का लिहाज रखते हुए इंडो नेपाल सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों को अपने मानवीय पक्षो को जीवित रखना नितांत आवश्यक है।

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