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उत्तराखंड हाईकोर्ट से स्वामी को लगा झटका

देवस्थानम बोर्ड एक्ट यथावत बना रहेगा

दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून

आज हाईकोर्ट में चार धाम देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ दायर जनहित याचिका का फैसला राज्य सरकार के पक्ष में सुना दिया गया है हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आर सी खुल्बे की खंडपीठ ने सुब्रमण्यम स्वामी और अन्य को झटका देते हुए प्रदेश सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया गया है।
हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर कहा कि अब वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे वही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता तो सबके पास है।

यहां गौरतलब है कि सुब्रमण्यम स्वामी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार को चुनौती देते हुए देवस्थानम बोर्ड एक्ट को असंवैधानिक करार दिया था और कहा था कि यह एक्ट संविधान के अनुच्छेद 25 26 और 32 के साथ-साथ जन भावनाओं के विरुद्ध है और हाईकोर्ट ने इस याचिका पर रोज सुनवाई करते हुए 6 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा था जिस पर राज्य सरकार ने कहा कि यह बिल्कुल भी असंवैधानिक नहीं है और इसमें संविधान के अनुच्छेद 25 26 और 32 का उल्लंघन नहीं होता है।

हाईकोर्ट  ने अपने आदेश में कहा कि चार धाम आम जनता का  मंदिर है और सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा ऐसा कोई सबूत नहीं दिया गया जोकि किसी विशेष धार्मिक संस्था द्वारा मंदिर निर्माण और उसके स्वामित्व को बताता है एक्ट के तहत केवल हिंदू धर्म से जुड़े लोग ही मंदिर में व्यवस्थाएं संभालेंगे और इससे किसी की भी धार्मिक स्वतंत्रता और भावनाओं को ठेस नहीं लगेगी कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि मंदिर स्वामित्व मंदिर के पास ही रहेगा और सरकार केवल मैनेजमेंट संभालेगी और मंदिर में अधिकार बोर्ड का रहेगा।
राज्य सरकार ने पूर्व में बद्री केदारनाथ मंदिर समेत 51 मंदिरों को शामिल करते हुए देवस्थानम बोर्ड का गठन किया है जिसका विरोध तीर्थ पुरोहितों ने किया और वह हाई कोर्ट गए थे लेकिन आज फैसला कोट द्वारा राज्य सरकार के पक्ष में सुनाया गया है।

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