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अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस एक मई पर विशेष आलेख

दी टॉप टेन न्यूज़ देहरादून

आज एक मई को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता था लेकिन इस बार कोरोनावायरस की महामारी ने पूरे विश्व में तांडव मचा के रखा है 133 सालों में ऐसा पहली बार होगा जब आज के दिन मजदूर दिवस नहीं मनाया जाएगा पूरे देश भर में कोरोना वायरस के कारण जहां लॉक डाउन जारी है वही  देशभर में मजदूर और श्रमिकों का बहुत बुरा हाल हुआ है यह वही वर्ग है जिसके बिना एक समाज कभी पूरा नहीं होता इस संकट की घड़ी में देश ने अपने बहुत से मजदूर साथियों को खो दिया कुछ मजदूर कई कई दिन पैदल चलने के बाद भूख प्यास से मर गए वही कुछ मजदूर इस आस में लगातार अपने घरों को चलते रहे कि शायद एक ना एक दिन अपने घर पहुंची जाएंगे।

इस मजदूर दिवस पर हम दिवंगत मजदूरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देते हैं।
भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1 मई 1923 को चेन्नई में हुई थी देश में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान ने 1 मई 1923 को मद्रास में पहली बार इसे मनाया था।
तब से लेकर आज तक हर साल 1 मई को विभिन्न संस्थाओं में कारखानों में यहां तक कि स्कूलों में भी मई दिवस मनाया जाता है और श्रमिकों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया जाता है लेकिन इस बार शायद सामूहिक रूप से तो यह संभव नहीं हो पाएगा लेकिन अगर हम चाहें तो अपने आसपास रहने वाले मजदूरों की सहायता करके इसे मना सकते हैं।

देश प्रदेश में बहुत सारी स्वयंसेवी संस्थाओं पुलिस प्रशासन और  स्वयंसेवकों ने  इस लॉक डाउन में जहां इन गरीब मजदूरों को भोजन उपलब्ध करवाया और अभी भी करवा रहे हैं वह सभी बधाई के पात्र हैं इन सभी के काम के प्रति समर्पण की वजह से अनेक अनेक श्रमिकों को खाना मिल पाया और आज भी मिल रहा है इस मजदूर दिवस पर इन लोगों के साथ साथ समाज के सामर्थ्य वर्ग को अपने आसपास रहने वाले मजदूरों श्रमिकों को आज के दिन कुछ ना कुछ जरूर देना चाहिए।

क्योंकि यही श्रमिक वर्ग हमारे देश का निर्माता भी है इसका एहसास हमें आज हो रहा है जब शासन प्रशासन कह रहा है कि हमें अपनी आर्थिक स्थितियों में सुधार करना होगा इसके लिए कुछ कार्य योजनाएं बनाई जा रही हैं लेकिन फिर पता चल रहा है की अपने राज्य में या हमारे क्षेत्र में कुशल श्रमिक वर्ग  नहीं है वह तो दूसरे राज्य में या अपने घरों को चले गए हैं तो इन परिस्थितियों में बहुत दिनों तक होने वाली आर्थिक गतिविधियों में फर्क जरूर पड़ेगा।

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